कैसे करें दांतों और मसूड़ों की उचित सुरक्षा। घरेलू उपचार द्धारा बच्चे को बचाएं सर्दी से।

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दांत केवल सौंदर्य बढ़ाने, दिखाने या फिर किसी को चिढ़ाने मात्र के लिए नहीं होते। ये केवल चेहरे की “शेप” को ही नहीं संभालते बल्कि पाचन प्रक्रिया इन्ही पर निर्भर रहती है दांत और मसूड़े ठीक होंगे तो चबाना व पचाना सरल हो जायेगा। 1. यदि खूब चबाया हुआ भोजन पेट में नहीं उतरेगा तो आँतों पर भारी पड़ेगा। भोजन में लार कम आने से यह पचता नही है।  2. कच्चा पनीर चबाने से दांतों में फंसे अनाज व मीठे को निकालना आसान हो जाता है। पनीर भी ना फंसा रहे इसलिए अच्छी तरह कुल्ला करें। 3. आंवले के छोटे टुकडे मुंह में रखें, चूसें। फिरकुल्ला करें। इस प्रकार दांत, मसूड़े मजबूत होंगे तथा विटामिन “सी” की कमी पूरी होगी।  4. नींबू का प्रयोग करने के बाद छिलके से दांत-मसूड़े से साफ करें। 5. पुदीना लाभकारी रहता है। इसका रस व चटनी पायरिया दूर करते हैं। 6. दही से खनिज तथा विटामिन की कमी पूरी होती है। जरूर सेवन करें। 7. फिटकरी के पानी से कुल्ला करना बहुत अच्छा रहता है। 8. खाद्य पदार्थ दांतों व मसूड़ों में न रहें, इसलिए दांत साफ रखें। लौंग का तेल केवल दर्द करते दांत पर लगाएं बाकी पर ना लगाएं। 9. शलज़म को कच्चा खाना, मुली तथा उसके पत्ते चबाना अच्छा रहता है। 10. कच्चा प्याज खाने से दांतों को मजबूती मिलती है। 11. दांतों व मसूड़ों की कीटाणुओं से रक्षा करने के लिए चेरी खाएं।

घरेलू उपचार द्धारा बच्चे को बचाएं सर्दी से Save The Baby From Cold Inflated By Home Remedies

Save The Baby From Cold Inflated By Home Remedies

अधिक सर्दी होने के कारण सभी बीमार पड़ सकते हैं, किंतु बच्चों पर सर्दी का असर बहुत जल्दी होने लगता है उन्हें सर्दी, जुकाम, खांसी आदि की तकलीफें हो जाती हैं। रसोई में उपलब्ध कुछ सामान (मसालों आदि) से आप बच्चों को ठीक कर सकते हैं। कुछ उपचार देखिए- 1. नींबू का रस व शहद समान मात्रा में लें, इन्हें मिलाकर बच्चे को चटाएं। खांसी नहीं होगी। 2. एक नींबू पर गीली मिट्टी लपेटें। आग में भूनें, अब इस नींबू का रस निकालें। जूस पीने से जुकाम से आराम मिलता है। सर्दी-जुकाम का प्रभाव खत्म करने के लिए तुलसी के सहारे में तुलसी के रस में शहर मिलाए विशेषताएं इससे सूखी खांसी गले की खराबी कफ वाली खांसी ठीक हो जाती है। मुलहठी, बादाम की गिरी, बिना बीच का मुन्नका तीनो को पीसें। छोटी गोलियां बनायें। एक-एक गोली चूसे।  यह आराम देंगी। 

पूरा साल करें पालक की खेती Please Complete The Year Cultivation of Spinach

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यूं तो हिमाचल प्रदेश में पूरा साल पालक की खेती की जा सकती है परंतु तराई और नीचले पहाड़ी इलाकों में सर्दियां ही इस खेती का सही व उपयुक्त समय है। उन्नत किस्में: बैनर्जी जॉइंट: स्वस्थ, लंबे फुले हुए पत्ते और आम पालक से दोगुने बड़े। उर्वरा मिट्टी की आवश्यकता। अौसत उपज 150-190 क्विंटल प्रति बीघा। पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्म। लौंग स्टैंडिंग: पत्ते गहरे रंग के तिकोने, मोटे, लंबे तथा धीरे-धीरे फैलने वाले बने अधिक फलदायक। औसत उपज 100-125 क्विंटल प्रति हेक्टेयर यानी 8 से 10 क्विंटल प्रति बीघा। शुष्क एवं शीत तथा ऊंचाई वाली पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त कीस्म।

वर्जिनिया सेबॉय: नर्म बीज वाली पौधे, सीधे सीधे स्वस्थ, गहरे हरे रंग के, आगे से पत्ते गोलाई वाले कुछ मुड़े तथा मोटे। औसत उपज 100-125 क्विंटल प्रति हेक्टेयर यानी 8 से 10 क्विंटल प्रति बीघा। मध्य तथा ऊँचे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त के समय किस्म। पूसा हरित: मध्यम लंबे पौधे, चौड़े गहरे हरे तथा थोड़े मुड़े हुए पत्ते, 40 से 50 दिन बाद कटाई के लिए तैयार।औसत पैदावार 250-280 क्विंटल हेक्टेयर यानी 20 से 25 किवंटल बीघा। बसंत तथा गर्मियों के मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म, क्षेत्र 1 तथा 2 के लिए उपयुक्त किस्म।

बुवाई का समय: नीचले पहाड़ी क्षेत्र: जुलाई-नवंबर और फरवरी-मार्च। मध्य पहाड़ी क्षेत्र: जुलाई-सितंबर। ऊंची पहाड़ी क्षेत्र: मार्च-जून, सितंबर। बीज की मात्रा: 25-30 तक और 10 सेंटीमीटर। खाद एवं उर्वरक: गोबर की खाद 100 क्विंटल प्रति हेक्टएर या 8 किवंटल प्रति बीघा। 1. जैविक खेती के लिए दोगुना कंपोस्ट। 2. कैन 300 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर या 25 किलोग्राम प्रति बीघा। 3. सुपर फास्फेट 315 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर या 25 किलोग्राम प्रति बीघा। 4. म्यूरेट ऑफ पोटाश 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर या 4 किलोग्राम प्रति बीघा। 5. गोबर की खाद, सुपर फास्फेट तथा म्यूरेट और पोटाश की पूर्ण मात्रा और कैन की आधी मात्रा बुवाई करते समय डालें और शेष केन का आधा भाग उसके लिए मास बाद डालें।

बीज उत्पादन: बीज उत्पादन के लिए फसल सामान्य फसल की ही तरह लगाई जाती है तथा खाद उर्वरकों की मात्रा बुवाई के समय ही दी जाती है। पृथक्करण के लिए एक किलोमीटर का अंतर रखें। अगर पालक लौंग स्टैंडिंग तथा वर्जिनिया सेबॉय में चार प्रकार के पौधे पाए जाते हैं: नर, वनस्पतिक नर,  दोलुंगी तथा मादा। जिनमें से केवल मादा तथा दुईलिंगी पौधों पर ही बीज लगते हैं। नर पौधे कमजोर होते हैं उन्हें उखाड़कर फेंक देना चाहिए।

तुड़ाई और गहाई: बीज लगभग एक ही समय पर थक जाता है। अतः इसका खेत में बिखरने का कम डर रहता है। 1. बीज के साथ पुरे पौधे को सुखाकर उसकी गहाई की जाती है। बीज प्राप्ति: 600 किलोग्राम से लेकर 800 किलोग्राम तक हेक्टेयर यानी 48 किलोग्राम से लेकर 64 किलोग्राम प्रति बीघा।

How Appropriate Protection of Teeth and Gums

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