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आधा सिर का दर्द (Migraine), अवसाद (Depression), जीर्ण शिरः पीड़ा (Chronic Headache)

  1. दिव्य मेधा क्वाथ – 300 ग्राम


एक चम्मच दवा लेकर रात को 400 मिलीo पानी में, सम्भव हो तो मिट्टी के बर्तन में भिगो दें। सुबह उबाल कर जब 100 मिलीo पानी शेष रह जाए तब छानकर खाली पेट पी लें। सुबह भिगोकर रात को सोने से पहले लें।

  1. दिव्य अमृतासत् – 10 ग्राम
  2. दिव्य मोती पिष्टी – 4 ग्राम
  3. दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  4. दिव्य गोदन्ती भस्म – 10 ग्राम

सब को मिलाकर 60 पुड़िया बना लें। सुबह – शाम खाली पेट शहद या गर्म पानी से लें।

नोट: रोग के अधिक जीर्ण होने पर एक माह की औषधि में रसराज रस 1 या 2 ग्राम का प्रयोग अति लाभदायक होगा।

  1. दिव्य मेधावटी: 2 – 2 गोली नाश्ते और शाम का खाना खाने के बाद गुनगुने पानी या दूध से लें।

जोड़ों का दर्द (Joint pain), गठिया (Gout), कमर दर्द, घुटनों का दर्द (Knee Joint Pain), सूजन आदि वातरोग

  1. दिव्य स्वर्णमाक्षिक भस्म – 5 ग्राम
  2. दिव्य महावातविध्वंसन रस – 10 ग्राम
  3. दिव्य प्रवाल पिष्टी – 5 ग्राम
  4. दिव्य बृहत् वातचिंतामणि रस – 1 ग्राम
  5. दिव्य गोदन्ती भस्म – 5 ग्राम

इन सबको मिलाकर 60 पुड़िया बना लें। 1 – 1 पुड़िया सुबह नाश्ते से और शाम खाने से एक घंटा पहले शहद या गर्म पानी से लें।

नोट: ज्यादा दर्द होने पर उपरोक्त पुड़िया में बृहत् वातचिंतामणि रस 2 या 3 ग्राम तक मिलाया जा सकता है। नये सामान्य दर्द में बृहत् वातचिंतामणि रस के बिना भी प्रयोग करने से अत्यंत लाभ होता है।  

  1. दिव्य योगराज गुग्गुलु – 60 ग्राम
  2. दिव्य चंद्रप्रभा वटी – 60 ग्राम
  3. दिव्य पुनर्नवादि मण्डूर – 40 ग्राम

तीनों में से 1 – 1 गोली लेकर सुबह नाश्ते व दोपहर – शाम खाना खाने के बाद गर्म पानी या दूध से लें।

गृध्रसी (Sciatica) मन्यास्तम्भ (Cervical Spondylitis) आदि पीड़ा के लिए

  1. दिव्य एकांगवीर रस – 10 ग्राम
  2. दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  3. दिव्य बृहत् वातचिंतामणि रस – 1 ग्राम
  4. दिव्य स्वर्णमाक्षिक भस्म – 5 ग्राम

सबको मिलाकर 60 पुड़िया बना लें। 1 पुड़िया सुबह नाश्ते से 1 घंटा पहले तथा 1 पुड़िया शाम को खाना खाने से 1 घंटा पहले शहद या गर्म पानी से लें।

  1. दिव्य त्रयोदशांग गुग्गुलु – 60 ग्राम
  2. दिव्य चंद्रप्रभा वटी – 60 ग्राम
  3. दिव्य पीडान्तक रस – 40 ग्राम

तीनों में से एक एक गोली लेकर सुबह, दोपहर तथा शाम खाना खाने के बाद गर्म पानी या दूध से लें।

परहेज : सभी प्रकार के दर्दों में दही, छाछ, कटाई, उड़द की दाल तथा फूलगोभी नहीं खाएँ।

साइनस (Sinusitis), दमा (Asthma), पुराना नजला (Chronic Rhinitis), प्रतिश्याय

  1. दिव्य श्वासारि रस – 20 ग्राम
  2. दिव्य अभ्रक भस्म – 5 ग्राम
  3. दिव्य प्रवालपिष्टी – 5 ग्राम
  4. दिव्य त्रिकटु चूर्ण – 10 ग्राम
  5. दिव्य सितोपलादि चूर्ण – 25 ग्राम

सबको मिलाकर 60 पुड़िया बना लें। 1 – 1 पुड़िया सुबह नाश्ते से और शाम खाने से एक घंटा पहले शहद या गर्म पानी से लें।

नोट: जीर्ण रोग की अवस्था में स्वर्ण वसन्तमालती 2 से 3 ग्राम तक मिलाने से अत्यंत लाभ करती है।

  1. दिव्य लक्ष्मीविलास रस – 20 ग्राम
  2. दिव्य संजीवनी वटी – 20 ग्राम

दोनों में से 1 – 1 गोली लेकर दो या तीन बार सुबह – शाम गर्म दूध या गर्म पानी से लें।

परहेज: घी, तेल खटाई ना लें। केला, दही, आइसक्रीम आदि ठंडी चीज़ नहीं खाएँ। गर्म जल का सेवन करें।

सोरायसिस (Psoriasis), एक्ज़ीमा (Eczema)

  1. दिव्य कायाकल्प क्वाथ: एक चम्मच दवा 400 मिलीo पानी में पकाएँ। 100 मिलीo शेष रहने पर सुबह नाश्तेशाम खाने से पूर्व लें।
  2. दिव्य रसमाणिक्य – 1 ग्राम
  3. दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  4. दिव्य कायाकल्प वटी – 20 ग्राम
  5. दिव्य अमृतासत् – 10 ग्राम
  6. दिव्य तालसिंदूर – 1 ग्राम

सबको मिलाकर 60 पुड़िया बना लें। 1 – 1 पुड़िया सुबह नाश्ते से और शाम खाने से एक घंटा पहले शहद या गर्म पानी से लें।

  1. दिव्य कैशोर गुग्गुलु – 60 ग्राम

2 – 2 गोली सुबह नाश्ते तथा शाम भोजन के बाद पानी से लें।

  1. दिव्य आरोग्यवर्धिनी – 20 ग्राम

1 – 1 गोली सुबह नाश्ते तथा शाम भोजन के बाद पानी से लें।

  1. महामंजिष्ठारिष्ट: 4 चम्मच दवा को 4 चम्मच पानी से मिलाकर खाने के बाद दिन में दो बार लें।
  2. दिव्य कायाकल्प तैल: प्रभावित स्थान पर दिन में दो बार लगाएँ।

नोट: इस क्वाथ के लेने से यदि अधिक दस्त हो तो इसकी मात्रा कम कर दें।

कर्कटाबुर्द (Cancer)

  1. दिव्य कायाकल्प क्वाथ – 100 ग्राम
  2. दिव्य सर्वकल्प क्वाथ – 200 ग्राम

इस चम्मच दवा 400 मिलीo पानी में पकाएँ, 100 मिलीo शेष रहने पर सुबह नाश्ते व शाम खाने से पूर्व लें।

  1. दिव्य संजीवनी वटी – 10 ग्राम
  2. दिव्य शिला सिंदूर –  3 ग्राम

3 दिव्य ताम्रभस्म – 1 ग्राम 

  1. दिव्य अमृतासत् – 10 ग्राम
  2. दिव्य अभ्रक भस्म – 5 ग्राम
  3. दिव्य हरीक भस्म – 300 – 500 मिo ग्राम
  4. दिव्य स्वर्ण वसन्तमालती – 2 – 4 ग्राम
  5. दिव्य मुक्तापिष्टी – 4 ग्राम
  6. दिव्य प्रवाल पंचामृत – 5 ग्राम

90 पुड़िया बनायें। 1 – 1 पुड़िया सुबह नाश्ते और दोपहर – शाम खाने से एक घंटा पहले शहद या गर्म पानी से लें।

नोट: फेफड़ों का कैंसर होने पर अभ्रक भस्म 5 ग्राम मिला देनी चाहिए। यदि खुजली या चर्म विकार हों तो उपरोक्त मेंसंजीवनी वटी लें।

  1. दिव्य कांचनार गुग्गुलु – 60 ग्राम
  2. दिव्य वृद्धिबाधिका वटी – 40 ग्राम

दोनों में से 2 – 2 गोलियाँ खाने के बाद गर्म पानी या दूध से लें। गोली निगलने में रोगी असमर्थ हो तो गोली का पाउडर करके कम मात्रा में दें।

सलाह: कैंसर के रोगी को गेहूँ के ज्वारे का रस 25 से 50 मिलीo तक +घृतकुमारी रस 25 मिलीo, गोमूत्र 25 मिलीo +ताजी गिलोय का रस 25 मिलीo + तुलसी के पत्ते 11 से 21 तक + नीम के पत्ते 5 से 7 तक मिलाकर सुबह शाम दोबार लेना चाहिए।

नोट: कैंसर चिकित्सा में विशेष रूप से रोगी की स्थिति व प्रकृति के अनुसार दवा की मात्रा कम या ज्यादा की जासकती है। यदि रोगी Chemotherapy या rediation चिकित्सा ले रहा हो तो उस स्थिति में यह औषधि उनचिकित्साओं के दुष्प्रभावों को कम करती है, साथ ही रोग को बढ़ने से भी रोकती है।

गर्भाशयाबुर्द (Fibroid Uterus)

  1. दिव्य शिला सिंदूर – 3 ग्राम
  2. दिव्य वृद्धिबाधिका वटी – 10 ग्राम
  3. दिव्य कहरवा पिष्टी – 10 ग्राम
  4. दिव्य मुक्ता पिष्टी – 3 ग्राम
  5. दिव्य अमृतासत् – 10 ग्राम
  6. दिव्य स्फटिक भस्म – 5 ग्राम

सबको मिलाकर 60 पुड़िया बना लें। 1 – 1 पुड़िया सुबह नाश्ते से और शाम खाने से एक घंटा पहले शहद या गर्म पानी से लें।

  1. दिव्य कांचनार गुग्गुलु – 60 ग्राम
  2. दिव्य स्त्री रसायन वटी – 60 ग्राम

दोनों से 1 – 1 या 2 – 2 गोली सुबह नाश्ते व दोपहर, शाम के भोजन के बाद गुनगुने पानी से लें।

मासिकधर्म में अतिरक्तस्त्राव होने पर

  1. दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  2. दिव्य कहरवा पिष्टी – 10 ग्राम
  3. दिव्य अमृतासत् – 10 ग्राम
  4. दिव्य मुक्ता पिष्टी – 4 ग्राम
  5. दिव्य बसन्तकुसुमाकर रस – 1 ग्राम

सबको मिलाकर 60 पुड़िया बना लें। 1 – 1 पुड़िया प्रातः नाश्ते से और सायं खाने से एक घंटा पहले शहद या गर्म पानी से लें।

  1. दिव्य स्त्री रसायन वटी – 60 ग्राम

सुबह – शाम दो – दो गोली खाने के बाद दूध या पानी से लें

नोट: शीशम के पत्तों का प्रयोग अतिरक्तस्त्राव में अत्यंत लाभदायक

यकृतशोथ (Hepatitis A, B, C)

  1. दिव्य सर्वकल्प क्वाथ – 300 ग्राम

एक चम्मच दवा 400 मिलीo पानी में पकाएँ। 100 मिली o शेष रहने पर प्रातः नाश्ते व सायं खाने से पूर्व लें।

  1. दिव्य प्रवाल पंचामृत – 10 ग्राम
  2. दिव्य कासीस भस्म – 5 ग्राम
  3. दिव्य स्वर्ण माक्षिक भस्म – 5 ग्राम
  4. दिव्य अमृतासत् – 10 ग्राम
  5. दिव्य स्वर्ण बसन्तमालती – 3 ग्राम

सबको मिलाकर 60 पुड़िया बना लें। 1 – 1 पुड़िया दिन में दो या तीन बार नाश्ते एवं खाने से पहले शहद या पानी से लें।

  1. दिव्य उदरामृत वटी – 60 ग्राम
  2. दिव्य आरोग्यवर्धिनी वटी – 40 ग्राम
  3. दिव्य पुनर्नवादि मण्डूर – 40 ग्राम

तीनों में से 1 – 1 गोली प्रातः नाश्ते व सांय खाने के बाद गुनगुने पानी या दूध से लें।

  1. श्योनाक (टोटला) क्वाथ – 300 ग्राम

10 ग्राम दवा को 300 मिलीo पानी में मिट्टी के बर्तन में सायंकाल भिगोएँ। प्रातः मसलकर, छानकर खाली पेट पी लें।

परहेज: चिकनाई, तली हुई चीज़ें, खटाई, अधिक तीव्र मसाले, एल्कोहल, चाय – कॉफी कोल्ड ड्रिंक्स आदि से बचें। 

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