सरकार को कर्मचारियों को उनके काम की क़ाबलियत को देखते हुए वेतन देना चाहिए।

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Government employees based on their work experience, the salary should be given read at alloverindia.in

सरकार के वेतन भतो ने कर्मचारियों को सिर पर चढ़ा रखा है। सरकार के निति नियमों के आधार पर दिए जाने वाले वेतन भत्तों ने कर्मचारियों को निकम्मा बना दिया है और इस बात को दरकिनार नहीं किया जा सकता की सातवें वेतन आयोग के तहत बढ़ाये गए वेतन के चलते कर्मचारी इस वेतन के काबिल हैं तो सर्वे के अनुसार पाया गया की इतना ही वेतन पाने वाले प्राइवेट कर्मचारी सरकारी कर्मचारियों की अपेक्षा काफी अनुभब रखते हैं। जबकि लोगों का यह मानना है की सरकारी नौकरी लोग इसीलिए ढूढ़ते हैं ताकि वह आराम से नौकरी कर सकें। अभी भी कुछ लोगो का कहना है की अगर साही नौकरी करनी है तो कोई भी सरकारी टैस्ट पास कर लीजिए और आराम प्र्स्त नौकरी मिल सकती है। सरकारी कर्मचारियों को जंग लग चुकी है और इनको महीने की तनख्वा के आलावा कुछ दिखाई नहीं देता। सरकार को कर्मचारियों के काम को समय – समय पर एनालाइज करना चाहिए। कई सरकारी नौकरी करने वाले यहाँ तक कहते हैं कि बेटा अगर आराम से नौकरी करनी है तो ये टैस्ट तुम्हे पास करना है एक बार सरकारी नौकरी मिल गई तो सारी उम्र एैस करोगे।

सरकार को नौकरियों के लिए क्या करना चाहिए।

  • जब किसी युवा को सरकारी नौकरी मिलती है। तो कुछ सालों के लिए सरकार को उस पोजीशन पर महीने की तनख्वा एक ही रखनी चाहिए जब प्रमोशन का समय हो तो इसके लिए टैस्ट होना चाहिए अगर वह टैस्ट पास कर लेता है तब वह प्रोमोशन का हक़दार है अन्यथा नहीं परन्तु एक साल बाद दोवारा से कैंडिडेट प्रमोशन के लिए टैस्ट दे सकता है।
  • सरकार को यह भी ध्यान में रखना चाहिए की महीने कि तनख्वा 50 हजार से ज्यादा ना दी जाए। आज की स्थिति के अनुसार 50 हजार तनख्वा काफी है।
  • 50 हजार से ज्यादा तनख्वा का मतलब है पैसे की अनदेखी करना इससे सरकार गतिशील तरीके से प्रगति नहीं कर पाती और बहुत सारा पैसा कर्मचारियों के हिसे चला जाता है।

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