कानों के रोग और उपचार, बिल्व तेल, मधु से मुक्ति, सिर रोग

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कानों के रोग और उपचार कान चि: 1. तिल के फूल, आक के पीले पत्ते तथा लहसुन इन तीनों को पीस कर दो – दो बूँद अर्क कान में डालते रहें इससे कान रोग ठीक जाएगा। 2. मूली का स्वरस, मदार के पत्तों का रस, सरसों का तेल इन तीनों को एक साथ पका लें। जब केवल तेल ही बाकी रह जाए तो उसे नीचे उतार कर ठंडा करके शीशे में डाल कर रख लें, कान में दर्द होने पर दो बूँद डालने से कान दर्द गायब हो जाएगा। बिल्व तेल: कच्चे बेल का गुदा 2.1/2 ग्राम बकरी का दूध 20 ग्राम दोनों का कलक बना कर बकरी का पेशाब 40 ग्राम तेल सरसों 10 ग्राम उक्त कलक में मिलाकर उसे खुले बर्तन में रख कर आग पर रख कर पकाएं जब खूब पक जाए तो नीचे उतार लें और शीशियों में भर लें कान दर्द होने पर दो – दो बूँद कान में डालें। मधु से मुक्ति: नींबू का रस 65 ग्राम, शहद 15 ग्राम, पीपल चूर्ण 4 ग्राम इन सबको एक साथ करके मिला कर किसी शीशी में भर कर रखें, उस शीशी का ढकना ढीला नहीं होना चाहिए।

बिजौरे नींबू के रस में सज्जी क्षार का चूर्ण मिलाकर कान में डालने से मधु के साथ अनेक कई रोगों से मुक्ति मिलती है। नारी के दूध में दूध में रसौंत तथा शहद मिलाकर कान में डालने से अनेक रोगों से मुक्ति मिलती है सिर रोग: बहुत अधिक परिश्रम, दूध का अधिक पीना, मलमूत्र के वेग को रोकना, असमय भोजन, दिमाग पर अधिक बोझ, जुकाम रोग के लगे रहने से यह रोग लग जाता है। उपचार – कूस तथा अरण्ड के बीज, कांजी में पीस आकर सिर, माथे, कनपटियों पर लेप करें तो यह उलझन दूर होगी।

  1. मुचकन्द के फूलों को पानी में पीस कर मस्तक को शांति मिलती है।
  2. दशमूल कवाय में सेंधा नमक व शहद डाल कर नसवार लेने से मस्तक का बोझ कम हो जाता है।
  3. सिरस के बीज तथा मूली के बीजों को पीस कर नसवार लेने से यह बोझ कम हो जाता है।
  4. चूल्हे की मिटटी तथा काली मिर्च पीस कर छान लें फिर इसे शीशी में भर कर रखें, मस्तक रोगी को इसका नसवार देने से शांति मिलती है।
  5. अद्रक का रस, पीपल, सेंधा में पीस कर सिर के जिस भाग में भारीपन लगता हो, उस पर लेप करें और ऊपर लिखी नसवार को लेने से दर्द का बोझ हल्का पड़ जाएगा।

कृम जन्य शूल

  1. सुंठ, काली मिर्च, पीपल, निरमाला की जड़ तथा सिहजना के बीज इन सबको मिला कर गौ के पेशाब में पीस कर सुखा कर नसवार तैयार करें, इसे लेने से कृमिजन्य रोग ठीक हो जाता है।
  2. नीम की छाल, झाऊ की छाल तथा चन्दन इन तीनों को मिलाकर मस्तक और कनपटियों पर लेप करने से यह रोग दूर हो जाता है।
  3. लाल मिर्च को थूहर के दूध में पीस कर मस्तक पर लेप करने से सकते हैं।