रोग चिकित्सा। बुखार क्या है। बुखार के चिन्ह। बुखार में किन चीज़ों से बचना है?

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बुखार का उपचार करने से पूर्व हमें यह देखना होगा की असल में यह बुखार है क्या? जब तक किसी रोग की पहचान नहीं कर पाते तब तक उसका उपचार भी नहीं कर सकते।  इसलिए पहले रोग को पहचानो। फिर उपचार को जानो बुखार के चिन्ह

1. बिना कुछ किये करे जब इंसान को थकावट होने लगती है और शरीर का रंग अपने आप बदलने लगता है।

2. आँखों में पानी तैरने लगता है।

3. बैठे बिठाए सर्दी लगने लगे अथवा अधिक गर्मी महसूस होने लगे।

4. शरीर टूटने लगे जमाइयाँ आने लगे।

5. भूख न लगना सिर का दर्द। बस ऐसे ही रूप होते हैं आम बुखार के, हर बुखार आरम्भ – आरम्भ में तो साधाहरण ही होता है परन्तु आगे चल कर इन साधाहरण बुखारों में से कोई एक बुखार गंभीर धारण कर लेता है।

बुखार में किन चीज़ों से बचना है?

1. बुखार में नहाना मना है।

2. चन्दन आदि का तेल न लगाओ।

3. शरीर पर शीतल लेपन करें।

4. दिन में सोना।

5. मैथुन परिश्रम न करें।

6. शीतल जल पान का प्रयोग।

7. क्रोध तथा ठंडी हवा से। बुखार का साधाहरण उपचार पवन रहित मकान में रहना, ताङके पंखो से हवा करना, मौसम को देखकर ठंडा या गर्म पानी पीना।

बुखार की अवस्था 1. 7 दिन तक रहने वाला बुखार तरुण होता है। 2. 12 दिन तक चलने वाला बुखार मध्यम होता है। 3. 12 दिन से ऊपर का बुखार जीर्ण ज्वर कहलाता है। बुखार में दूध की मात्रा 4 ग्राम औषधि 32 ग्राम दूध में 150 ग्राम पानी को मीठी आग पर पकाएं जब उसका भाग शेष रह जाए  उसे नीचे उतार के ठंडा होने पर छान लें। 2. पानी से दूध दुगना तथा बुरादा शीशम खस डाल कर पकाएं, जब थोड़ा सा रह जाए तो इसे उतार कर ठंडा करके छान कर रोगी को दें तो हर प्रकार का बुखार टूट जाता है।

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बुखार का साधाहरण उपचार गिलो नीम की छाल (2) धनिया (3) पदमाग खस) (4) धनिया (5) रक्त चन्द इसे गुडुचायादि क्वाय कहते हैं, यह सब तरह के बुखारों को दूर करता है। आरोग्य पंचक कवाय (1)अमलतास (2)पीपल मूल (3)मागर मोथा कुटकी (4) हरड़ इनका कवाय आम तथा उदर सब प्रकार  बुखारों का नाश करता है। गुंथायाचि चूर्ण (1)सोंठ (2)कपूर (3)हल्दी (4)देवदार (5) पुहमरमूल (6)गुर्च (7)इलाइची (8) मुरकी (9)पित्त पापड़ा (10)काकड़ (11)श्रृगी या जवक्षार (12)चिरपत्ता (13)दशमूल की समस्त औषधियों का चूर्ण बना कर फिर उसमें सेंधा नमक डाल कर पी लेने से हर प्रकार के बुखार उत्तर जाते हैं। 

सुदर्शन चूर्ण (1)पारा 1 माशा (2)गंधा 1 माशा(3) काली मिर्च 1 माशा इन सबको मिलाकर तीन दिन तक घुटाई करें। छोटी छोटी गोली बना लें। बुखार के रोगी को 1 गोल अदरक के रस के साथ खिला दें इसके पश्चात दिन में तीन गोली और तीन – तीन घंटे के अंतर से खिलाने से बुखार उतर जाएगा। गर्मी लगने पर दही, चावल, बैंगन, पंखे की हवा, ठंडे पानी का सेवन करते रहें। धूमकेतु रस (1)शुद्ध पारा (2)शुद्ध गंधक (3)शुद्ध शिंगरफ (4)शुद्ध समुद्र फेम, इन सबको बराबर, मात्रा में लेकर अदरक के रस में पूरा दिन खरल करें इसके पश्चात ग्राम वजन की गोलियाँ बना कर रखें, बुखार के रोगी के लिए  1 गोली अदरक के रस के साथ बराबर रोगी को दिन में 3 बार खिलाने से बुखार का नाश हो जाएगा।

बुखार भेद और उनका इलाज वात बुखार के लक्षण शरीर कांपने लगे, गला एवं होंठ खुश्क सुखें, बुखार का विषम वेग हो, निद्रा न आना, छीकें न आना। शरीर का टूटना, यह सब वात बुखार के लक्षण होते हैं। उपचार वृo पंचमूलादि कवाय बेलगिरी श्योनाक पाडर कुभेंर करणी, खरैटी कुलची, पुहाकर मूल, इनका कवाय हर प्रकार के वात बुखार को नष्ट करता है। किरातादि कवाय (1)चिरायता (2)गिल्यो(3)सुगंध माल (4)कटाई कटेरी (5)पृष्ठवर्णी (6)शालपर्णी (7)रिस्ना(8)पीपल(9)पीलमूल (10)मूठ (11)चिरायता (12)सोंठ (13)नागर मोथा (14)बरैटी (15)गुर्च (16)सुगंध वाला (17)दाख (18)जवासा (19)समवर इन सबका कवाय बनाकर पीने स उपद्रव युक्त वात बुखार उतर जाता है।

विल्वादि कवाय (1)चिरायता (2)गिल्यु (3)सुगंध वाला (4)कटाई कटेरी (5) गोखरा (शालपर्णी (7)पृष्ठपर्णी इन सबका कवाय तैयार करके वात रोगी को देने से बुखार नष्ट हो  जाता है। पिपल्यादि कवाय (1) पीपल मूल (2)गिलोयो (3)सोंठ इन सबका कवाय वात बुखार को नष्ट करता है। मिर्चादिक कवाय (1) सोंठ (2) मिर्च (3) पीपल (4) चीता (5) सेंधा नमक यह सब मिलाकर कवाय तैयार करके रोगी को दें तो उसका बुखार शीघ्र उतर जाएगा।  लेप करना बकरी के दूध में भांग मिलकर हाथ पाँव के तलुओं पर लेप करने से बात बुखार भागता नजर आता है। कल्पतरु रस (1) शुद्धपारा (शुद्ध गंधक (3)शुद्ध सींगिया (4)शुद्ध मैनसिल (5)शुद्ध सोना मक्खी (6) शुद्ध सुहागा। इन सबको 1 ग्राम लेकर, सोंठ, काली मिर्च, पीपल 2 – 2 ग्राम, 1 प्रथम पारा और गंधक को कज्जली के पश्चात सब औषधियों को बारीक़ पीसकर एक जान कर लें, बारीक़ कपडे से छान कर अदरक के रस में मिलाकर 1 ग्राम की 10 गोली बनाएं। 1 गोली शहद को अदरक के रस में मिलाकर रोगी को दिन में 4 बार देने दे बुखार भाग जाएगा।  पित्त के बुखार और उनका उपचार पित्त बुखार लक्षण क्या होते हैं अतिसार स्वल्प निद्रा, वमन, कंठ, होंठ, नासिका पाम, स्वेद आना, प्रलाप, मुखकुटु, मूर्छा, मतातयदोष, तृषा तथा विष्टा पेशाब पीला आना। 

पर्यटादि कवाय (1) पित्त पापड़ा (2)अडूसा (3) कुरकी (4)चिरायता (5)धनिया (6)फूल प्रयंगु (7)इनके कवाय में चीनी डालकर पीने से पित्त बुखार उतर जाता है तथा तृषा दाह रक्तपित्त शमन होता है। द्रक्षादि कवाय (1)सौगी (2) हरड़ (3) नागर मोथाकुटकी (4)अमलतास (5)पित्तपापड़ा  कवाय पित्त बुखार के लिए बहुत अच्छा होता है। चन्दनादि कवाय (1)चन्दन (2)सुगंध वाल (3)नेत्रवाल (4)पित्त पापड़ा (5)मोथा (6)सोंठ (7)मिर्च (8)चिरायता (9)खस। इन सबका कवाय पित्त बुखार के रोगियों के लिए अति लाभकारी है। प्रलेप (1)ढांक (2)बेरी (3)नीम के पत्तों को पीसकर बुखार रोगी के हाथ और पावं तलवों पर लेप करने  पित्त बुखार दम तोड़ देता है।

पटोल पत्रादि कवाय (1)इंद्र जौ (2) धनिया (3) महुअत इन सबको कवाय पित्त बुखार भाग जाता है। कफ बुखार कफ बुखार के लक्षण शरीर भीगे वस्त्र के समान बुखार, बुखार थोड़ा – थोड़ा, सुस्ती, शरीर का टूटना, मुँह मीठा – मीठा, पेशाब विष्ठा (टट्टी)सफ़ेद, भाग युक्त, शरीर में भारीपन सिर जकड़ा हुआ सा नींद अधिक आना, आँखे सफ़ेद रात को अधिक खाँसी आने के कारण नींद का न आना, यह सब कफ बुखार के लक्षण माने जाते हैं।

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