Cost Price, Incremental Cost, Market Price, Standard Price

0
141
Cost Price function at alloverindia.in

1 लागत मूल्य (Cost Price):- इस विधि के अनुसार, हस्तांतरण करने वाले उपविभाग की प्रति इकाई उत्पादन लागत के आधार पर कम्पनी के एक उपविभाग से दूसरे उपविभाग को वस्तुओं और सेवाओं का हस्तांतरण किया जाता हैं। यह लागत या तो उत्पादन की वास्तविक लागत अथवा उत्पादन की प्रमाप लागत हो सकती है। हस्तांतरण मूल्यन की इस विधि का लाभ यह है कि यह परिचालन की दृष्टि से अति सरल और सुविधाजनक विधि है। किन्तु, इससे इस अर्थ में विभिन्न उत्तरदायित्व केंद्रों के लाभ के आंकडे विकृत हो जाते हैं कि हस्तांतरण करने वाले केंद्र के लाभ का न्यून-मूल्यांकन होता है एवं जिस केंद्र को हस्तांतरण किया जा रहा है, उसके लाभ का अधि-मूल्यांकन हो जाता है। वस्तुतः हस्तांतरण मूल्यांकन की यह विधि लाभ केंद्र विश्लेषण के लिए अनुपयुक्त होती है।

2 सामान्य लाभ सहित लागत (Cost plus a Normal Mark-Up):-

Cost plus a Normal Mark Up at alloverindia.in website

साधारण लागत मूल्य विधि की कमियों को दूर करने की दृष्टि से अनेक कम्पनियाँ हस्तांतरण मूल्य का निर्धारण करने के लिए लागत में लाभ का एक उपान्त जैसे लागत का 15% जोड़ देती हैं। इस प्रकार, इस विधि में क्रय करने वाले सम्भाग पर हस्तांतरण करने वाले विभाग की वास्तविक प्रति इकाई उत्पादन लागत में लाभ का एक निश्चित राशि जोड़ कर प्रभार डाला जाता है। इस विधि का भी गुण इसकी सरलता तथा सुगमता है; किन्तु यह विधि भी लाभ केद्र विश्लेषण के लिए एक उपयुक्त विधि नहीं होती है क्योंकि किसी एक विभाग की लागत के साथ-साथ उसकी अकार्यक्षमता भी अन्य विभाग को हस्तांतरण हो जाती है।

3 वृद्धिशील लागत (Incremental Cost):-

कृतिपय कम्पनियों द्धारा प्रयोग की जाने वाली हस्तांतरण मूल्यांकन की एक अन्य विधि हस्तांतरण करने वाले विभाग की वृद्धिशील लागत है। वृद्धिशील लागत की गणना दो ढंग से की जा सकती है जो परिस्थिति विशेष पर निर्भर करती है। यदि उसी एक ही कम्पनी के अंतर्गत सम्पूर्ण उत्पादन का एक विभाग से दूसरे को हस्तांतरण किया जाता है तो हस्तांतरण करने वाले केद्र की कुल परिवर्तनशील लागत में स्थायी लागत, यदि कोई हो जिसे उक्त केद्र पर प्रत्यक्ष रूप से प्रभारित किया जाता हो, के योग को वृद्धिशील लागत कहते  हैं। इस प्रकार से संगणित वृद्धिशील लागत भी ‘लागत मूल्य विधि’ के ही दोषों से ग्रस्त होती है।  दूसरा दृष्टिकोण उस स्थिति में प्रयोग किया जा सकता है जब वस्तुएँ एवं सेवाएँ बाह्रा ग्राहकों को बेची जा रही हों और साथ में इनका उसी कम्पनी के अंतर्गत भी हस्तांतरण किया जाता हो। ऐसी स्थिति में वृद्धिशील ;लागत आगम की हानि के रूप में, जिसे हस्तांतरण करने वाला विभाग बाह्रा ग्राहकों से चार्ज करताहै,अवसर लागत हो सकती है। यह दूसरा दृष्टिकोण ‘बाजार मूल्य आधार’ के समान है और लाभ केद्र विश्लेषण के लिए अधिक उपयोगी है।

4 लागत का आनुपातिक सहभागी लाभ (Shared Profit Relative to the Cost):-

Shared Profit Relative to the Cost read at alloverindia.in

इस विधि के अनुसार अंतः कम्पनी हस्तांतरण के लिए कोई मूल्य प्रभारित नहीं किया जाता है। इसकी अपेक्षा, कम्पनी के कुल बिक्री आगम में से विभिन्न विभागों की लागतों के योग को घटकर सम्पूर्ण कम्पनी का लाभ ज्ञात लिया जाता है और तत्प्श्चात् प्रत्येक केद्र के लागत आधार के अनुपात में इस लाभ में विभिन्न लाभ केद्रों की सहभागिता तय की जाती है। यथा, Share of profit of a Particular Profit Center = Profit of the company * Cost of Particular Profit Center/Total Cost, इस प्रकार, इस विधि के अंतर्गत प्रत्येक विभाग की लागत के अनुसार लाभ में सहभागिता यह की जाती है। इस विधि का दोष यह है कि अकार्यक्षमता का मूल्यांकन नहीं हो पाता है। इसलिए यह लाभ केद्र विश्लेषण की एक उपयुक्त विधि नहीं है।

5 बाजार मूल्य (Market Price):-

इस विधि में अंतः-कम्पनी हस्तांतरण के लिए चार्ज किये वाले मूल्यों का निर्धारण बाजार मूल्य पर, न कि लागत आधार पर किया जाता है। बाजार मूल्य की संगणना करने के तीन ढंग है प्रथम, यदि सक्रिय बाजार हो तो उसी कम्पनी के विभिन्न विभागों के वस्तुओं और सेवाओं के हस्तांतरण का मूल्यांकन करने के लिए प्रचलित बाजार मूल्य लिया जा सकता है जो छूट तथा अन्य बिक्री व्ययों के समायोजन के बाद का हो सकता है। इस विधि का मुख्य लाभ यह है जिसका यह दोनों विभागों के लाभदायकता हित  की सुरक्षा करता है, क्योंकि क्रेता विभाग से वही चार्ज किया जाता है जिसका यह विभाग बाहरी लोगों को भुगतान करता, और हस्तांतरण करने वाला विभाग से वही कीमत प्राप्त करता है जो किसी भी स्थिति में बाहरी लोगों से प्राप्त किया होता।  इसके अतिरिक्त, बिक्री व वितरण लागत तथा अशोध्य ऋण की लागत कम कर दी जाती हैं और हस्तांतरण करने वाला विभाग एक सुनिश्चित बाजार प्राप्त करता है, जबकि क्रेता विभाग नियमित और समय से सुपुर्दगी के लिए आश्वस्त रहता है। दूसरे, जहाँ सक्रिय बाजार का अस्तित्व नहीं होता है अथवा बाजार मूल्य उपलब्ध नहीं होता है, सामान्य लाभ सहित लागत को एक युक्तिसंगत बाजार मुख्य के रूप में माना जा  सकता है।  परन्तु तब एक विभाग की अकार्यक्षमता दूसरे विभाग को हस्तांतरित हो जायेगी। तीसरे, कम्पनी बाजार से बोली या नीलामी आमंत्रित कर सकती है जिससे कि बाजार मूल्य का निर्धारण किया जा सके। सबसे न्यूनतम बोली को हस्तांतरण हेतु बाजार मूल्य के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। फिर भी, गलत बोली, या बिलकुल किसी बोली के अभाव के कारण समस्या उत्पन्न हो सकती है।

6 प्रमाप मूल्य (Standard Price):-

हस्तांतरण मूल्य पूर्व-निर्धारित प्रमाप मूल्य आधार पर भी निश्चित किया जाता है। प्रमाप मूल्य उत्पादन की लागत और प्रचलित बाजार दशाओं के आधार पर निर्धारित किया जा सकता है। इस प्रकार, कुशल विभागों की तुलना में वांछित कुशलता से कम स्तर पर कार्य करने वाला विभाग कम लाभ प्रदर्शित करेगा। हालाँकि, विभिन्न विभागों को स्वीकार्य प्रमाप करने में कठिनाइयाँ उत्पन्न हो सकती है।

7 सहमत मूल्य (Negotiated Price):-

अंतः कम्पनी हस्तांतरण मूल्य क्रय करने वाले तथा हस्तांतरण करने वाले विभागों के बीच बातचीत या सहमति के आधार पर भी निर्धरित किया है। बातचीत के उपरान्त ज्ञात किया गया मूल्य पारस्परिक सहमत मूल्य होता है। ऐसी मूल्यन विधि विभागों के साथ- साथ सम्पूर्ण कम्पनी दोनों के लिए लाभप्रद होती है। इस विधि का केवल तभी प्रयोग किया जा सकता है जब क्रय करने वाले और हस्तांतरण करने वाले दोनों विभागों समक्ष वैकल्पिक चयन के अवसर उपलब्ध हों।

8 द्धि-मार्गीय मूल्य (Dual or Two-Way Price):-

इस विधि के अनुसार, हस्तांतरण करने करने वाले विभाग का एक कीमत स्वीकृत होता है जबकि क्रय करने वाले विभागों से एक भिन्न मूल्य चार्ज किया जाता है। यह विधि लाभ केद्रों के श्रेष्ठ मूल्यांकन या आंकलन  सम्भव बनाती है, और हस्तांतरण मूल्यों के कारण उनके मध्य विवाद उत्पन्न होने से बचाव करती है। तथापि, विभिन्न विभागों का कुल लाभ समग्र कम्पनी के वास्तविक लाभ से भिन्न होगा। किन्तु, यह कम्पनी के समक्ष कोई समस्या खड़ी नहीं करती है क्योंकि हस्तांतरण मूल्य केवल निष्पादन मूल्यांकन के\के आंतरिक प्रयोजनों के लिए होता है।

हस्तांतरण मूल्यन विधि का चयन (Selecting of Transfer Pricing Method)

विभिन्न हस्तांतरण मूल्यन विधियों का अध्ययन प्रकट करता है कि ऐसी विशिष्ट विधि नहीं है समस्त स्थितियों के लिए स्थितियों के लिए सर्वश्रेष्ठ कहलाता सके। किसी विधि विशेष का चयन विशिष्ट परिस्थितियों निर्भर करता है, जो एक स्थिति से दूसरी स्थिति में भिन्न हो सकती हैं। तथापि, हस्तांतरण मूल्य का निर्धारण करते समय निम्नलिखित सामान्य नियमों या कसौटियों को मस्तिक में रखना चाहिए:

अ) हस्तांतरण मूल्य वस्तुपरक ढंग से निर्धारित-योग्य होना चाहिए।

ब) हस्तांतरण मूल्य को आदान-प्रदान की जाने वाली वस्तुओं/ सेवाओं के समानुपातिक हस्तांतरण करने वाले विभाग क्षतिपूर्ति चाहिए एवं क्रय करने वाले विभाग से वसूलना चाहिए।

स) इसे विभाग के लक्ष्यों और संगठन के लक्ष्यों के बीच सर्वांगसमता या एकरूपता का योगदान करना चाहिये। 

द) इसे लाभ केद्र मूल्यांकन की व्यवस्था करनी चाहिए; एवं

य) इसे संगठनात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में अधिकतम प्रयास करना चाहिए।

उत्तरदायित्व लेखांकन के लाभ (Advantages of Responsibility Accounting)

प्रबन्धतन्त्र उत्तरदायित्व लेखांकन का नियंत्रण युक्ति के रूप में उपयोग करता है। जो भिन्न-भिन्न लागत केद्रों प्रभारी होते हैं। उनके निष्पादन तुलना उनके लिए निर्धारित लक्ष्यों से की जाती हैं और निम्न परिणामों के लिए समुचित कार्यवाही की जाती हैं। अतएव उत्तरदायित्व लेखांकन प्रत्येक के व्यवसाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

1 उत्तरदायित्व का निर्धारण (Assigning of Responsibility):-

संगठन के प्रत्येक व्यक्ति कुछ न कुछ उत्तरदायित्व सौंप दिया जाता है और वे अपने कार्य के लिए उतरदेय होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति यह जानता है कि उससे क्या आशा की जाती है। उत्तरदायित्व की पहचान आसानी से की जा सकती है तथा विभिन्न व्यक्तियों संतोषजनक और असंतोषजनक निष्पादन जानकारी हो जाती है। यदि कहीं त्रुटि हुयी है तो कोई भी व्यक्ति अपने उत्तरदायित्व को दूसरे व्यक्ति विवर्तित नहीं कर सकता है। अतएवं इस प्रणाली के अंतर्गत व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायित्व निश्चित किया जाता है।

2 निष्पादन में सुधार (Improves Performance):-

विशिष्ट व्यक्तियों के लिए कार्य निर्दिष्ट करना एक प्रेरणात्मक तत्व या घटक के रूप में कार्य करता है। विभिन्न क्रिया-कलापों के लिए व्यक्ति यह भली-भाँति जानते हैंकि उनके निष्पादन की रिपोर्ट उच्च प्रबंध को दी जायेगी। इसलिए, वे अपने कार्य-निष्पादन में सुधार लाने का भरसक प्रयास करते हैं। इसी, प्रकार  निम्न निष्पादन को हतोत्साहित भी करता है क्योंकि कार्य-निष्पादन के लिए उत्तरदायी व्यक्ति जानते हैं कि वे अपने कार्य  परिणाम के लिए उतरदेय हैं और उन्हें निम्न निष्पादन के लिए स्पष्टीकरण देना होगा।

3 लागत नियोजन सहायक (Helpful in Cost Planning):-

उत्तरदायित्व लेखांकन प्रणाली अंतर्गत लागतों आगमों से संबंधित सम्पूर्ण सुचना का संग्रहण किया जाता है। ये आँकड़े भावी लागतों व आगमों के नियोजन में, प्रमाप निश्चित करने में तथा बजट तैयार करने में सहायक होते हैं।

4 प्रत्यायोजन एवं नियंत्रण (Delegation and Control):-

यह प्रणाली प्रबंध को इस योग्य बनाती है कि उसके लिए एक ओर  अधिकार प्रत्यायोजन अर्थात् भारर्पण करना तथा दूसरी ओर समग्र नियंत्रण अपने हाथ में बनाये रखना सम्भव हो पाता है। निर्दिष्ट कार्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिकार का प्रत्यायोजन किया जाता है। दूसरी ओर, विभिन्न व्यक्तियों का उत्तरदायित्व निश्चित कर दिया जाता है उन व्यक्तियों   के कार्यों नियंत्रण में सहायक होता है। नियंत्रण की व्यवस्था उच्च प्रबंध के हाथ में बनी रहती है क्योंकि प्रत्येक लागत केद्र के निष्पादन का प्रतिवेदन उच्च प्रबंध को नियमित रूप  प्रेषित किया जाता है। इस प्रकार प्रबंध अधिकार का प्रत्यायोजन  समर्थ हो पाता है और साथ ही साथ नियंत्रण भी उसके पास ही बना रहता है।

5 निर्णयन में सहायक (Helpful in Decision-Making):-

उत्तरदायित्व लेखांकन न केवल एक नियंत्रण युक्ति ही है वरन यह निर्णयन में भी सहायक होता है। इस प्रणाली के अंतर्गत संग्रहीत सूचना प्रबंध के लिए अपनी भावी कार्यवाहियों का नियोजन करने में सहायक होती है। विभिन्न लागत केन्दों का विगत निष्पादन उन केन्द्रों के भावी लक्ष्यों को निश्चित करने में सहायक होता है। इस प्रकार यह प्रणाली प्रबंध को महत्वपूर्ण निर्णय लेने के योग्य बनाती है।

अंतः में, हम निष्कर्ष रूप में कह सकते है कि उत्तरदायित्व लेखांकन सभी प्रकार के उपक्रमों के लिए उपयोगी होता है, चाहे उपक्रम बड़ा हो या छोटा, लाभकारी, सरकारी, आदि। किन्तु, उत्तरदायित्व लेखांकन की प्रणाली एक संगठन से दूसरे संगठन में भिन्न-भिन्न हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त, इसके अनेक लाभ होते हुए भी यह स्मरण रखना चाहिए कि उत्तरदायित्व लेखांकन एक उत्तम प्रबंध का स्थानापन्न नहीं हो सकता है क्योंकि यह प्रबंधतंत्र द्धारा प्रयोग किया जाने वाला एक उपकरण औजार मात्र है।

Click Buy Online Account Books