जीएसटी पर बनी सहमति 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत की चार स्लैब होंगी।

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Consensus on GST 3 November 2016

अप्रत्यक्ष करो के क्षेत्र में प्रस्तावित नई वस्तु तथा सेवाकर जीएसटी प्रणाली के तहत 5,12,18 और 28 प्रतिशत की चार स्तरीय कर व्यवस्था रखे जाने का निर्णय किया है। जीएसटी परिषद के तीन नवम्बर को इस चार स्तरीय जीएसटी कर ढांचे पर अपनी सहमति जताई है। सबसे निम्न दर आम उपयोग की वस्तुओं पर लागू होगी जब की सबसे ऊंची दर विलासिता और तंबाकू जैसी अहितकर वस्तुओं पर लागू होंगी। ऊँची दर के साथ इन पर अतिरिक्त उपकर भी लगाया जाएगा। महंगाई को ध्यान में रखते हुए खाद्यान्न सहित आवश्यक उपयोग की कई वस्तुओं को टैक्स फ्री रखा गया है। इस लिहाज से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में शामिल तमाम वस्तुओं में से करीब 50% वस्तुओं पर कोई कर नहीं लगेगा। इन्हें शून्य कर की श्रेणी में रखा गया है। जीएसटी परिषद की 3 नवंबर को शुरू हुई दो दिवसीय बैठक के पहले दिन वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने इस फैसले की जानकारी दी उन्होंने कहा कि जीएसटी प्रणाली के तहत 5% की दर सामान्य उपयोग की वस्तुओं के लिए होगी। जबकि 12 और 18 प्रतिशत की दो मानक दरें होंगी। सरकार की कोशिश जीएसटी को 1 अप्रैल 2017 से लागू करने की है। श्री जेटली ने कहा की सबसे ऊंची 28 प्रतिशत की दर उन वस्तुओं पर लागू होगी जिनमें वर्तमान में उत्पाद शुल्क और वैट सहित कुल 30-31 प्रतिशत की दर से कर लगता है। इनमें लग्जरी कारें, तंबाकू, और ठंडे पर ऊँची दर के साथ ही स्वछ ऊर्जा उपकर तथा राज्यों को राजस्व की हानि की क्षतिपूर्ति के लिए एक नया उपकर लगाया जाएगा।

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“जीएसटी परिषद की बैठक में चार स्तरीय कर ढाँचे को मंजूरी दी गई है” इससे पहले चर्चा में आए 6, 12, 18 और 26% के कर ढाँचे में बदलाव के साथ किया गया। श्री अरुण जेटली जी ने कहा केंद्र सरकार ने सोने पर 4 प्रतिशत जीएसटी लगाने का प्रस्ताव किया है। इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है।”

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श्री अरुण जेटली जी ने बताया कि अतिरिक्त उपकर और स्वच्छ ऊर्जा कर सहित जो भी राजस्व प्राप्त होगा। उसे एक अलग कोष में रखा जाएगा। इस राजस्व का इस्तेमाल राज्य को यदि कोई राजस्व नुकसान होता है। उसकी भरपाई के लिए किया जाएगा। जीएसटी लागू होने के पहले 5 साल तक यह व्यवस्था बनी रहेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू होने के पहले साल राज्य के राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए ₹50,000 करोड़ की आवश्यकता होगी। जीएसटी व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार के स्तर पर लगने वाले उत्पाद, शुल्क, सेवाकर और राज्य में लगने वाले वैट तथा अन्य कर सभी अप्रत्यक्ष कर हो जायेंगे। जीएसटी परिषद की बैठक में जिस चार स्तरीय कर ढाँचे को मंजूरी दी गई है। वह इससे पहले चर्चा में आए 6, 12, 18 और 26 प्रतिसत के कर ढाँचे में मामूली बदलाव के साथ किया गया। श्री अरुण जेटली जी ने कहा कि केंद्र सरकार ने सोने पर 4% जीएसटी लगाने का प्रस्ताव किया है। बहरहाल इस पर अभी निर्णय नहीं किया जा सका है।

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वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार श्री अरविंद सुब्रमणियन का कहना है कि जीएसटी परिषद के व्यापक उपभोग वाली वस्तुओं पर वस्तु एवं सेवाकर जीएसटी की दर 5% रखने का निर्णय किया है। जिससे बड़े पैमाने पर महंगाई कम होगी और मुद्रास्फीति का दबाव हल्का होगा। श्री अरविंद सुब्रमणियन ने कहा की संसोधित प्रस्ताव से कीमतें कम होंगी। मुझे नहीं लगता कि 6% को 5% टैक्स की दर किए जाने से मुद्रास्फीति का कोई डर है। कुछ वस्तुएं 26 से 28 प्रतिशत के कम दायरे में चले जाएंगे, लेकिन कुछ 26 से निकलकर 18 प्रतिशत के कर दायरे में आ जाएँगी। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर इससे मुद्रास्फीति कम होगी और अगर कुछ हुआ भी तो असर बहुत कम होगा। आज के बदलाव से यह होना भी चाहिए।

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