चाइना के सामान का बहिष्कार और स्वदेशी अपनाओ यही चाइना को रास आएगा।

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The exclusion of goods made in China

भारत जैसे समृद्ध देश पर चीन ने अपने पैर पसारने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। आज भारत का हर नागरिक चीन में बने हुए सामान का इस्तेमाल भरपूर कर रहा है। अकेला भारत चीन से सबसे ज्यादा सामान खरीदने वाला देश है और चीन को भी पता है कि भारत के लोग खरीददारी में सबसे आगे हैं। सुबह ऑफिस जाने से लेकर और पूरा समय ऑफिस में गुजारने तक का समय यहां तक कि रात को सोने से लेकर सुबह जागने तक हम चीन के सामान का इस्तेमाल करते हैं। यूं समझ लीजिए चीन ने अपने देश में बने सामान को भारत के घर-घर तक पहुंचा दिया है। अगर हम आज कहें की क्या भारत देश आजाद है तो यह सही बात है। परंतु क्या भारत के लोग आजाद है “नहीं” चीन के सामान ने हम लोगों को गुलामी के जंजाल में फंसा रखा है। चीन दुनिया में सबसे ज्यादा व्यापार भारत में ही करता है। इसके बावजूद चीन पाकिस्तान जैसे आतंकवादी देश का साथ देता है और भारत देश के लिए हर बार मुश्किलें खड़ी करता आ रहा है। परंतु भारत के लोगों को चाहिए कि चीन को उसी की भाषा में जवाब दिया जाए, क्यों भारत के लोग चीन में बने सामान का इस्तेमाल कर रहे हैं अगर हम लोग चीन में बने सामान का इस्तेमाल कर रहे हैं तो चीन को इसका एक बड़ा फायदा हो रहा है। चीन यह क्यों भूल जाता है कि वह जिस थाली में खा रहा है उसी में छेद भी कर रहा है। सरकार को इस मुद्दे से पीछे हटना चाहिए अगर भारत का हर नागरिक यह प्रण कर ले कि चीन में बने सामान का इस्तेमाल नहीं करना है तो चीन की हेकड़ी 2 महीने में निकलना शुरू हो जाएगी। हमारे भारत में भी इस तरह का समान बनता है। हमें उसी सामान को इस्तेमाल करने की आदत डालनी होगी ताकि चीन की तरह भारत देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत बन सके।

2014 के चुनावों में बीजेपी BJP की सरकार बनी है। जिसका नेतृत्व श्री नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री के रूप में कर रहे हैं। मेक इन इंडिया बीजेपी का भारत देश को सुदृढ़ बनाने का प्रोग्राम है। मेक इन इंडिया के तहत् बड़ी आसानी से भारत में आप लोग कोई भी छोटी बड़ी कंपनी का निर्माण करके भारत को एक विशाल व्यापारिक देश बना सकते हैं और कई बड़ी कंपनियां इस मेक इन इंडिया के तहत काम भी कर रही है। बाहर के देशों से भी कई कंपनियां भारत में आकर निवेश कर रही है और तरह-तरह के उद्योग लगा कर सामान तैयार किया जा रहा है। मेक इन इंडिया के तहत जो भी सामान तैयार किया जाएगा उसके ऊपर मेक इन इंडिया की मोहर लगती है जिस तरह से मेक इन चाइना लिखा होता है।

कौन कौन सा सामान चीन का बना हुआ भारत के लोग इस्तेमाल कर रहे हैं आइए जरा नजर डालते हैं।

सुबह जब हम ऑफिस पहुंचते हैं तो सबसे पहले दीवार पर टंगी हुई घड़ी चाइना की हो सकती है। कंप्यूटर स्क्रीन और ऑफिस के टेबल पर रखा हुआ सामान ज्यादातर चाइना का बना हुआ हम लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। जब हम घर पहुंचते हैं तो हमारे सोने के कमरे से लेकर रसोईघर तक में जो सामान पड़ा होता है अधिकतर चाइना का बना हुआ है। जैसे टेबल लैंप, दीवार घड़ी, अलार्म घड़ी, मोबाइल, हाथ की घड़ियां, लैपटॉप, कंप्यूटर, सब्जी के जार, चम्मच और चीनी मिट्टी का बना हुआ अधिकतर सामान जैसे भगवान की मूर्तियां, ग्लास, चाय की प्यालियां, प्लेट, कड़छी इत्यादि यहां तक जब आप अपने शौचालय में जाते हैं तो वहां पर भी चाइना का सामान हमारा पीछा नहीं छोड़ता। बाथरूम में नल, गीजर इत्यादि सामान अधिकतर चीन में बना हुआ हम लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। इतना सब चाइना का सामान हम लोग इस्तेमाल कर रहे हैं फिर हम किस मुंह से कहें कि हम आजाद हैं। हम अभी भी गुलामी भरी जिंदगी जीने पर मजबूर है।

चीन में बने हुए सामान का बहिष्कार भारत में होना शुरू हो चुका है, परंतु अभी भी कुछ लोग ऐसे हैं जो चाइना के सामान को नजरअंदाज नहीं कर पा रहे हैं हमें दुकान से कोई भी सामान खरीदने से पहले यह देख लेना चाहिए कि इस सामान पर मेक इन चाइना की स्टैंप तो नहीं लगी है। कुछ लोग चाइना में बने सामान की निंदा भी करने लग चुके हैं। हम सभी को यह प्रण करना चाहिए कि चाइना में बनी कोई भी वस्तु का हम इस्तेमाल नहीं करेंगे केवल स्वदेशी वस्तु ही दुकान से खरीदेंगे। औरतों के सजने सवरने का अत्यधिक सामान चीन में ही तैयार किया जाता है और भारत देश की औरतें इस सामान को धड़ाधड़ खरीद लेती है। भारत की सभी औरतों को एकजुट होकर यह प्रण लेना चाहिए कि उन्हें चाइना से आने वाले लहंगे, ब्रेसलेट, घड़ियां, त्वचा से संबंधित सामान को नहीं खरीदना है। तभी हम लोग चाइना के सामान से आजाद हो सकेंगे।

भारत के कई व्यापारी लोग इस बात को ध्यान में रखें जो भी छोटा-मोटा सामान भारत की कंपनियों में तैयार किया जा रहा है उस पर मेक इन इंडिया कि स्टैम्प जरूर लगाएं क्योंकि हमने अक्षर मार्केट में देखा है जो चीनी मिट्टी के सामान होते हैं उनके ऊपर ना तो चाइना की स्टैम्प होती है और ना ही इंडिया की स्टैम्प। सरकार को मेक इन इंडिया के तहत यह भी जरूरी कर देना चाहिए कि जो भी सामान भारत की कंपनियों में तैयार किया जा रहा है। उसके ऊपर मेक इन इंडिया जरूर लिखा हो। चाहे वह कितना ही छोटा सामान क्यों ना हो ऐसा होने से लोग मार्केट में केवल मेक इन इंडिया का ही सामान खरीदने लगेंगे। क्योंकि अभी भी चाइना के सामान का पूरी तरह से भारत देश से बहिष्कार नहीं हो पा रहा है। चाइना के साथ भारत के जो व्यापारिक समझौते हुए उनके तहत भारत भी एकदम से पाबंदी नहीं लगा सकता क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर के समझौतों को किसी भी देश की सरकार खारिज नहीं कर सकती है इसके लिए अलग प्रकार की प्रणाली के तहत पाबंदियां लगाई जा सकती है। लेकिन जितना सामान हम लोग अपनी दिनचर्या में करते हैं उसमें 90% सामान चाइना का ही बना हुआ है। हम लोगों को धीरे-धीरे यह आदत डालनी होगी की जितना कम सामान हम चाइना का इस्तेमाल कर सके उतना करें। हम लोग भारत देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सहयोग कर सकेंगे।

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