वित्तीय उत्तोलक अथवा समता पर व्यापार Financial Leverage or trading on Equity

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Financial Leverage or trading on Equity

पूँजी मिलान या दंतीकरण पद का प्रयोग समता अंश पूँजी, संचयों और आधिक्य को सम्मिलित करते हुए, का पूर्वाधिकार अंशपूंजी तथा अन्य स्थिर ब्याज वाले ऋण के साथ संबंध का वर्णन करने के लिए किया जाता है। यदि पूर्वाधिकार अंश पूँजी तथा  अन्य स्थिर ब्याज वाले ऋण, संचयों को सम्मिलित करते हुए समता अंश पूँजी से अधिक हो जाती है तो कहा जाता है कि संस्था में ‘उच्च मिलान या दंतीकरण’ है। संस्था को उस स्थिति में ‘निम्न मिलान या दंतीकरण’ में कहते हैं जब पूर्वाधिकार अंश पूँजीतथा स्थिर ब्याज वाले ऋण समता पूँजी व संचय से कम होते हैं। Financial Leverage or trading on Equity

Capital Gearing Ratio = Equity Share Capital + Reserve & Surplus / Preference Capital + Long – term Debt bearing fixed interest, 2) उत्तोलक (Leverage), उत्तोलक  का निम्नांकित वर्गीकरण किया जा सकता है: अ) वित्तीय उत्तोलक (Financial Leverage) ब) परिचालन  उत्तोलक (Operating Leverage) स) संयुक्त उत्तोलक (Combined Leverage)

वित्तीय उत्तोलक अथवा समता पर व्यापार (Financial Leverage or trading on Equity)

“समता अंश पूँजी के साथ स्थिर ब्याज  वाले ऋण और पूर्वाधिकार अंश पूँजी” पद का प्रयोग ‘ वित्तीय उत्तोलक’ या ‘समता पर व्यापार’ कहलाता है। यह स्वामियों की समता है। जिसका ऋण प्राप्त करने के लिए आधार के रूप में प्रयोग किया जाता है और इसलिए इसे ‘समता पर व्यापार’ कहते हैं। किसी  संस्था द्धारा दीर्घ- कालीन स्थिर ब्याज वाले ऋण का नियोजन इन संसाधनों के प्रयोग द्धारा इनकी कहते है। किसी संस्था द्धारा दीर्घ-कालीन स्थिर ब्याज वाले ऋण का नियोजन इन संसाधनों के प्रयोग द्धारा इनकी लागत से अधिक अर्जित करने के लिए किया जाता है ताकि स्वामियों के समता  पर प्रत्याय में वृद्धि की जा सके। उदारहण के लिए   एक कम्पनी में 100 रु प्रति अंश वाले 1000 अंशो की पूर्ण दत्त समता  पूंजी है और यह 30,000 रु का औसत लाभ अर्जित करती है। कम्पनी विस्तार करना चाह रही है और इसके लिए 1,00,000 रु की आवश्यकता है। कम्पनी के सामने ये विकल्प हैं- या तो नये अंशो का निर्गमन करे अथवा 10% वार्षिक ब्याज दर पर ऋण पर ऋण प्राप्त करे। यह मानते हुए कि कम्पनी पहले की दर से लाभोपार्जन करेगी, कम्पनी के लिए ऋण प्राप्त करने का परामर्श देना उपयुक्त होगा क्योकि ऐसा करने से प्रति अंश अर्जन में अभिवृद्धि होगी। कम्पनी को ब्याज के रूप में केवल 10000 रु भुगतान करना पड़ेगा और यह आशा की जाती है कि उसका लाभ 60000 रु होगा। कम्पनी को ब्याज के रूप में केवल

10000 रु भुगतान करने के उपरान्त, समता अंशधारकों के लिए उपलब्ध लाभ 50000 रु होगा यानी वर्तमान में 30% के स्थान पर उनके समता 50% होगा। फिर भी, उत्तोलक का प्रतिकूल परिचालन भी होता है, यदि दीर्घ-कालीन ऋणों पर ब्याज संस्था के लाभ की सम्भावित दर से अधिक हो। इसलिए संस्था की पूंजी सरंचना की योजना बनाने में सावधानी बरतनी चाहिए। वित्तीय उत्तोलक की गणना निम्नांकित सूत्र द्धारा कर सकते है:

Financial Leverage = Earnings before Interest & Tax (EBIT) / Earnings before Interest & Tax – Interest & Preference Dividend

ब) परिचालन उत्तोलक

इसे दतांश अर्थात् बिक्री में से परिवर्तनशील लागत घटाकर शेष को ब्याज व दर के पूर्व अर्जन, यानी E.B.I.T. से विभाजित करने पर प्राप्त किया जा सकता है, इस प्रकार,

Operating Leverage = Contribution / Earnings before Interest and tax

स) संयुक्त या मिश्रित उत्तोलक (Combined Leverage)

 वित्तीय उत्तोलक एवं परिचालन उत्तोलक का आशय में गुणा करने पर प्राप्त फल संयुक्त या मिश्रित उत्तोलक कहलाता है। यथा,

Combined Leverage = Financial Leverage * Operating Leverage.

  • ऋण समता अनुपात (Debt Equity Ratio)

इस अनुपात का वर्णन दीर्घ-कालीन क्षमता की स्थित का विश्लेषण करते समय पहले किया जा चुका है।

कुल विनियोग का दीर्घ-कालीन दायित्व पर अनुपात (Total Investment to Long-term Liabilities

इस अनुपात की गणना करने के लिए दीर्घ-कालीन दायित्व से विभाजित करते हैं।

Ratio of Total Investment to Long-term Liabilities = Shareholders’ fund + Long-term Liabilities/ Long-term Liabilities

2) चालू दायित्वों का स्वामित्व कोष अनुपात (Ratio of Current Liabilities to Proprietors’ fund)

यह अनुपात चालू दायित्वों और स्वामित्व कोष के बीच संबंध स्थापित करता है तथा अल्प-कालीन उधार के स्थान पर स्वामियों द्धारा सृजित किये गए दीर्घ-कालीन ऋण की रकम  ओर संकेत करता है। इस अनुपात की गणना के लिए निम्न सूत्र का प्रयोग करते हैं:

Ratio of Current Liabilities to Proprietors’ fund = Current Liabilities/ Proprieties’ funds

3) संचयों का समता अंश पूँजी से अनुपात (Ratio of Reserves to Equity Share Capital)

यह अनुपात संचयों एवं समता अंश पूँजी के मध्य संबंध स्थापित करता है। यह अनुपात इस ओर संकेत करता है कि फर्म द्धारा भावी विकास के लिए सामान्यतः कितना लाभ प्रतिधारित किया जाता है। यह अनुपात जितना ऊँचा होगा, साधारणतया यह कहा जाता है कि फर्म की उतनी अधिक स्थिति होगी। इसकी गणना हेतु निम्न सूत्र है:

Ratio of Reserves to Equity Share Capital = Reserves / Equity Share Capital *100