बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ लड़कियों की अहमियत को पहचानिए।

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Beti Bachao Beti Padhao

अपने आसपास देखिए आपके घरों, स्कूलों, कॉलेजों में और काम पर कितनी लड़कियां दिखाई देती है। जनगणना 2011 के अनुसार हिमाचल प्रदेश में 1000 लड़कों पर सिर्फ 972 लड़कियां हैं। आखिर यह लड़कियां क्यों गायब हो रही है। लोगों को लड़कियों की अहमियत का अंदाजा ही नहीं है। उन्हें लगता है कि सिर्फ लड़कों से वंश चलता है। उन्हें दहेज भी नहीं देना और मां-बाप के बुढ़ापे की लाठी भी वही है। आजकल के माहौल में लड़कियों की सुरक्षा की चिंता भी रहती है। इन रुढ़िवादी सोच विचारों से लड़कियों के हक जैसे संपत्ति में अधिकार या स्वयं निर्णय लेने का अधिकार उनसे छिना जाता है। लिंगभेद व लिंग चयन क्या है। लड़के के जन्म पर थाली बजाई जाती है और मिठाइयां बांटी जाती हैं। लेकिन लड़की पैदा हो तो कोई बधाई तक नहीं देता। लिंग चयन लड़कियों के प्रति भेद भाव है। इसके कई कारण हैं। परिवार में पुरुषों को ज्यादा महत्व देना और अल्ट्रासाउंड जैसे स्वास्थ्य संबंधित वैज्ञानिक तकनीकों का गलत इस्तेमाल होना जब आप लिंग भेद या लिंग चयन स्वीकारते हैं तो आप लड़कियों के प्रति असमानता को बढ़ावा देते हैं।

इसमें चिंता की क्या बात है।

Beti Bachao Beti Padhao abhiyan by shivnya Sharma

लिंग भेद व लिंग चयन मानवाधिकारों का उल्लंघन है और महिलाओं के प्रति भेदभाव का एक विकृत रूप है। लड़कियों की संख्या कम होने से पूरे समाज पर गहरा असर पड़ रहा है। लड़कियों की तस्करी अपहरण बलात्कार और जबर्दस्ती विवाह के कारण महिलाएं और समाज दोनों असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।अगर आप किसी तकनीक के इस्तेमाल से सिर्फ बेटे को जन्म दे रहे हैं तो आप कानून तोड़ रहे हैं। पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत गर्भधारण करने के लिए चिकित्सीय तकनीकों का इस्तेमाल करना या गर्भ में पल रहे भ्रूण का लिंग पता लगाना गैर कानूनी है। गर्भ का चिकित्सीय समापन अधिनियम 1971 के अनुसार आप गर्भपात करवा सकते हैं। लेकिन भ्रूण की लिंग जांच करके गर्भपात करवाना कानून के अंतर्गत अपराध है गलती किसकी है। लिंग भेद व लिंग चयन किसी एक जाति वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं है। इसके लिए पूरा समाज जिम्मेदार है कई महिलाएं हिंसा के डर से चुप रहती हैं लेकिन कई महिलाएं साहस से विरोध भी करती हैं इस विरोध में सरकारी तंत्र और पुलिस आपके साथ है।

लड़कों और लड़कियों को समान अधिकार मिलना चाहिए।

Boys and girls should have equal rights

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण तथा कल्याण कानून 2007 के अंतर्गत बेटे और बेटी दोनों पर माता-पिता की देखरेख की समान जिम्मेदारी है। हिंदू उत्तराधिकार कानून 2005 के अनुसार लड़कियों को पारिवारिक संपत्ति में लड़कों के बराबर हिस्सा मिलना चाहिए। दहेज निषेध कानून 1961 के तहत दहेज लेना और दहेज देना दोनों अपराध है। घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण कानून 2005 के अंतर्गत महिलाएं को घर में होने वाली हिंसा से सुरक्षा मिलती है।

आप बदलाव ला सकते हैं।

Recognise the importance of girls

लड़कियों की अहमियत को पहचानिये। महिलाएं वह लड़कियां परिवार और समाज के सामर्थ्य में बहुत बड़ा योगदान व स्थायित्व प्रदान करती है। अपने घर में बेटियों का स्वागत कीजिए। आप यह ध्यान रखें कि आप की बेटियों और आस पड़ोस की लड़कियों को संतुलित भोजन, शिक्षा और चिकित्सा की सुविधा मिले। आप महिलाओं के प्रति हिंसा, अनुचित व्यवहार और यौन उत्पीड़न को ना सहे। दहेज ना ले और ना दें तथा अपनी लड़कियों को संपत्ति में बराबर का हिस्सा दें अपनी बेटियों का विवाह उन्हीं घरों में कीजिए जहां महिलाओं की इज्जत व सुरक्षा हो। प्रत्येक माता पिता अपनी बेटी को खुश देखना चाहते हैं। लेकिन जिस परिवार में बेटी का जन्म ना हो क्या वह किसी दूसरे की बेटी को खुश देख सकते हैं। जिस घर में महिलाओं की इज्जत नहीं होती है। वह आपकी बेटी का घर नहीं हो सकता। इसलिए आप अपनी बेटी का विवाह उन परिवारों में नहीं करें जो अपने यहां लड़कियों को जन्म देना नहीं चाहते। लिंग भेद और लिंग चयन कानूनन अपराध है। ऐसी किसी भी तकनीक का इस्तेमाल ना करें जो आपको लिंग चयन के बारे में सूचित करें या फिर लड़का पैदा होने का भरोसा दे। अगर आप ऐसे किसी व्यक्ति डॉक्टर या चिकित्सालय के बारे में जानते हो जो वैज्ञानिक तकनीक से लिंग चयन के बारे में बताएं या लड़का पैदा करने का आश्वासन दें तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग या पुलिस अधिकारी को सूचित करें।

हिमाचल प्रदेश में लिंग अनुपात जनगणना2011

क्रम संख्या जिला लिंग अनुपात महिलाएं प्रति 1000 पुरुष
01 बिलासपुर 981
02 चंबा 986
03 हमीरपुर 1095
04 कांगड़ा 1012
05 किन्नौर 819
06 कुल्लू 942
07 लाहौल -स्पीति 903
08 मंडी 1007
09 शिमला 915
10 सिरमौर 918
11 सोलन 880
12 ऊना 976
हिमाचल प्रदेश 972