Basis of Flexibility Fixed Budget and Fiexible Budget

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Basis of Flexibility Fixed Budget and Fiexible Budget

1 स्थायी बजट(Fixed Budget):- स्थायी बजट वह बजट है जो निर्दिष्ट क्रियाशीलता स्तर के लिए तैयार किया जाता है। इसमें उत्पादन-स्तर  परिवर्तन के साथ-साथ कोई परिवर्तन नहीं होता है। यह बजट वित्तीय वर्ष के प्रारम्भ होने के पूर्व तैयार किया जाता है। जैसे, यदि किसी संस्था का वित्तीय वर्ष जनवरी में आरम्भ होता है तो एक या दो माह पूर्व यानी नवंबर या दिसंबर में ही इस बजट को तैयार कर लिया जाता है। यदि अनुमानित व्ययों में कोई परिवर्तन होता है तो उसका कोई समायोजन इस बजट में नही किया जाता है। आई. सी. डब्ल्यू. ए. लन्दन के अनुसार “स्थायी बजट वह बजट है जो वास्तव में प्राप्त किये गये क्रियाशीलता स्तर को ध्यान में रखे बिना इस प्रकार प्राकल्पित किया जाता है कि उसमे कोई परिवर्तन नही होगा।” (Fixed Budget is a budget which is designed to remain unchanged irrespective of the level of activity actually attained.”) स्थायी बजट स्थैतिक दशाओं में ही उपयुक्त होता है। यदि बिक्री, व्यय तथा लागतों का अधिक शुद्धता के साथ पूर्वानुमान लगाया जा सके तो इस बजट का लाभप्रद ढंग से उपयोग किया जा सकता है।

2 लोचदार बजट (Fiexible Budget):- आई. सी.एम.ए. इंलैण्ड के अनुसार “लोचदार बजट वह बजट है जो इस प्रकार बनाया जाता है कि क्रियाओं के विभिन्न स्तरों के अनुसार परिवर्तित होता रहे।” (A flexible budget may be defined as a budget which is designed to change in accordance with the level of activity attained.”) इस प्रकार लोचदार बजट में क्रियाशीलता के विभिन्न स्तरों के लिए बजटों की एक श्रृंखला सम्मिलित होती है। एक लोचदार बजट व्ययवसाय की दशाओं में अदृश्य परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है। इस प्रकार के बजट को बनाने के लिए अप्रत्यक्ष व्ययों को स्थिर, अर्द्ध-परिवर्तन लागतों में विभक्त कर दिया जाता है। संयंत्र की एक निश्चित उत्पादन क्षमता स्तर तक स्थायी व्ययों में कोई परिवर्तन नहीं होता है, जबकि उत्पादन में वृद्धि या कमी के आधार पर परिवर्तनशील व्ययों में परिवर्तन होता है। इस प्रकार, स्थिर, अर्द्ध-परिवर्तनशील तथा परिवर्तनशील लागतों के बीच अन्तर को ध्यान रखते हुए तैयार किया गया बजट लोचदार बजट कहलाता है, जो क्रियाशीलता के स्तर में परिवर्तन के साथ परिवर्तित होता है।   लोचदार बजट उसी स्थिति में उपयोगी होता है, जहाँ क्रियाशीलता के स्तर में समय-समय पर परिवर्तन होता रहता है। जब माँग का पूर्वानुमान करना अनिश्चिता हो या सम्भव न हो तथा उघम सामग्री, श्रम, आदि की अल्प आपूर्ति की दशाओं में संचालित किया जा रहा हो,  तो बजट अधिक उपयुक्त होता है।

            स्थायी बजट एवं लोचदार बजट में अंतर

     Difference Between Fixed And Flexible Budget

अंतर का आधार स्थायी बजट  Fixed Budget लोचदार बजट Flexible Budget
1परिदृढ़ता         (Rigidity) स्थायी बजट परिवर्तित दशाओं को ध्यान में रखेबिना अपरिवर्तित रहता है। यदि व्यवसाय की मात्रा में परिवर्तन होता है तो भी यह बेलोचदार रहता है। लोचदार बजट परिवर्तित परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाता है।यदि परिस्थितियों की माँग हो तो इसमे उपयुक्त समायोजन कर लिए जाते हैं।

 

2. दशाएँ    (Conditions) स्थायी बजट  कल्पना की जाती है कि दशाएँ स्थिर रहेंगी। यदि क्रियाशीलता के स्तर में परिवर्तन होता है तो बजट में भी तदनुरूप परिवर्तन कर लिया जाता है।
3 लागत वर्गीकरण (Cost classification) स्थायी बजटों में लागतों का उनकी प्रकृति के अनुसार वर्गीकरण नहीं किया जाता है। लागतों का उनकी प्रकृति के अनुसार यानी स्थिर, परिवर्तनशील और अर्द्ध-परिवर्तनशील लागतों में वर्गीकरण किया जाता है।
4 मात्रा में परिवर्तन (Changes in Volume) यदि क्रियाशीलता के स्तर में परिवर्तन होता है तो बजटीय एवं वास्तविक परिणामों में तिलना नहीं की जा सकती है क्योंकि आधार में ही परिवर्तन हो जाता है। उत्पादन मात्रा में परिवर्तन होने पर बजट पुनः बनाये जाते हैं तथा इस प्रकार बजटीय एवं वास्तविक आंकड़ों में तुलना करना सम्भव होता है।
5 पूर्वानुमान (Forecasting) ठीक-ठीक परिणामों का पूर्वानुमान लगाना कठिन हैं। लोचदार बजट क्रियाओ के परिचालन पर व्ययों के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं और इससे ठीक-ठीक पूर्वानुमान लगाने में सहायता मिलती है।
6 लागत निर्धारण

(Cost Ascertainment)

परिवर्तित परिस्थितियों के अंतर्गत लागतें निर्धारित नहीं की जा सकती है। क्रियाशीलता के विभिन्न स्तरों पर लागतें आसानी के साथ निर्धारित की जा सकती हैं। इससे कीमतों को निर्धारित करने में सहायता मिलती है।

कुछ महत्वपूर्ण बजट (Some Important Budgets):-

विक्रय बजट (Sales Budgets):-‘विक्रय बजट’ अवधि के दौरान संभावित बिक्री का एक अनुमान होता है। वक्री बजट किसी उपक्रम का नाड़ी केंद्र अथवा मेरुदण्ड कहलाता है। बिक्री के अनुमान की शुद्धता की मात्रा परिचालन बजटों के व्यवहारिकता को निर्धारित करती है। एक विक्रय बजट वह प्रस्थान बिंदु है जिस पर अन्य सभी बजट आधारित होते हैं।

विक्रय बजट मूल्य के साथ-साथ परिमाण में सम्भाव्य बिक्री समंक प्रस्तुत करता है। यह विक्रय विभाग की व्यापक योजना और कार्यक्रम निर्धारित करता है। विक्रय बजट को तैयार करने का उत्तरदायित्व विक्रय प्रबंधक पर होता है। वह इसके लिए आंतरिक और बाह्रा स्त्रोतों से उपलब्ध की गयी सभी सम्भव सूचनाओं का उपयोग करता है। विक्रय बजट बनाते समय सभी सम्भव तत्वों पर विचार करना चाहिए, जिसका विवेचन निम्न प्रकार है:

1 विगत विक्रय आंकड़े (Past Sales Figures):- विक्रय पूर्वानुमान विगत विक्रय आंकड़ों पर आधारित होते हैं। एक से अधिक वर्षों के विक्रय आंकडे बिक्री की प्रवृति निर्धारित करने में सहायक होते हैं अधोमुखी एवं उधर्वमुखी बिक्री निश्चित करने में बहुत उपयोगी होती है। वास्तवक विगत विक्रय आंकड़े सर्वाधिक विश्वसनीय मापदण्ड होते हैं जिन पर विक्रय बजट आधारित होते हैं। संभावित मौसमी उच्चावन,सम्भाव्य माँग व्यापार चक्रों की स्थिति आदि भी विक्रय बजट तैयार करने में सहायक होते हैं।

2 विक्रयकर्ताओं के मूल्यांकन एवं प्रतिवेदन (Assessment and Reports by Salesmen):- भावी माँग का अनुमान लगाने के लिए विक्रयकर्ता सबसे अधिक उपयुक्त व्यक्ति माने जाते हैं जिनका बाज़ार एवं ग्राहकों से सीधा संबंध होता है। उनका अनुभव उन्हें बिक्री अनुमानों से बाज़ार की स्थिति के बारे में करने में अधिक समर्थ बनाता है। विक्रय प्रबंधक को बिक्री अनुमानों से बाजार की स्थिति के बारे में धारणा बनाने में सहायता मिलती है। किन्तु विक्रय प्रबंधक को विक्रयकर्ताओं के आंकड़ों का प्रयोग करने के पूर्व सावधानी के साथ सूक्ष्म-निरीक्षण करना चाहिए ताकि ये आंकड़े पक्षपातपूर्ण न हों। विक्रयकर्ताओ को उनके व्यक्तिगत विचार तथा रुख बिक्री का कम अनुमान लगाने या अधिक अनुमान लगाने के लिए प्रेरित के सकते हैं। विक्रय प्रबंधक विक्रयकर्ताओं के अनुमानों की सहायता से बाज़ार दशा के बारे में एक निश्चित धारणा बना पाता है। अतः विक्रय प्रबंधक को इन विक्रय अनुमानों को विक्रय बजट सम्मिलित करने के लिए आंकड़ों का विवेकपूर्ण प्रयोग करना चाहिए।

3 कच्चे माल की उपलब्धता (Availability of Raw Materials):- कच्चे माल की उपलब्धता भी एक महत्वपूर्ण घटक है, जिस पर विक्रय बजट बनाते समय विचार करना चाहिए। कुछ दशाओं में कच्चा माल आधार या मुख्य घटक होता है। एक संस्था के लिए उपलब्ध कच्ची सामग्री की मात्रा विक्रय प्रबंधक को बिक्री के आकड़ों का अनुमान लगाने में सहायक होती है। इसके अतिरिक्त, विक्रय लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सामग्री की आपूर्ति बिना किसी बाधा के सुचारुपूर्वक होना आवश्यक है।

4 मौसमी उच्चावचन (Seasonal Fluctuations):- विक्रय बजट तैयार करते समय मौसमी उच्चावचनों के प्रभाव पर भी विचार करना चाहिए। वस्तुओं की माँग किसी समय अधिक हो सकती है, जबकि किसी समय उनकी कम माँग हो सकती है। इस संबंध में प्रयास यह होना चाहिए कि मौसमी उउतार-चढ़ाव का प्रभाव कम से कम ताकि उत्पादन का समुचित परवाह बना रहे। इसके लिए ग्राहकों को छूटें या गैर-मौसमी रियायतें प्रदान की जा सकती हैं।

 5 वित्त की उपलब्धता (Availabilityof Fluctuations):- कभी-कभी वित्त की उपलब्धता एक सीमित घटक हो जाती हैं। उत्पादन के लिए विभिन्न तत्वों के क्रय हेतु वित्त की आवश्यकता पड़ती है। विक्रय बजट वितीयबजट के साथ तैयार करना चाहिए। विक्रय प्रयास के विस्तार के लिए अतिरिक्त पूँजी की आवश्यकता पड़ती है। अतः यह आश्वस्त हो लेना चाहिए कि इन उद्देश्यों के लिए अपेक्षित वित्त सुलभ हो सकेगी।

6 संयंत्र क्षमता (Plant Capacity):- माल की बिक्री उसके उत्पादन होने के बाद ही होती है, अतः विक्रय बजट बनाते समय माल के उत्पादन की क्षमता पर भी विचार करना चाहिए। एक ओर, यह ध्यान में रखना चाहिए कि विक्रय बजट वर्तमान उपलब्ध संयंत्र क्षमता के अंतर्गत हो। दूसरी ओर, जो भी विक्रय प्रयास हो, वह संयंत्र क्षमता के पूर्ण उपयोग को आश्वस्त करे।