Basic Health Care Issues And Solutions

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लकवा फाजिल 1. जिन लोगों के एक अंग पर फाजिल गिर गया हो, उन रोगियों को 25 ग्राम लहसुन पिसा हुआ आधा किलो दूध में उबाल लें, जब यह खीर की भाँति गाढ़ा हो जाए तो उसे उतार कर ठंडा कर  खिला दें, यह दवा लम्बे समय तक चलेगी। 2. 250 ग्राम लहसुन को पीस कर 500 ग्राम सरसों का तेल और दो किलो पानी लोहे  कड़ाही में डालकर उसे गर्म करें, जब उसमें से उबलते हुए सारा पानी जल जाए तो उसे नीचे उतार कर ठंडा करें। ठंडा होने पर उसे छानकर एक बोतल में डालें, लकवे के रोगी के उस अंग पर हर रोज दो तीन बार मालिश करने से यह रोग दूर हो जाएगा। दिल के रोग कोलोस्ट्रोल के अधिक मात्रा में मानव शरीर में जमा होने के कारण ही होता है इस विषय में डॉक्टरों तथा हमारे आयुर्वेद आचार्यों ने जो नए परीक्षण किये हैं, उन्हें आधार मान कर हम इस निश्चय पर पहुंचे हैं कि लहसुन दिल के रोगियों  काफी लाभदायक है परन्तु कैसे? इसे जानने से पूर्व आपको पहले यह जान लेना जरुरी है।

कोलेस्ट्रॉल क्या है? यह एक ऐसा पदार्थ है जो चर्बीदार होता है। जब यह बढ़ जाता है तो हमारी साँस नलिकाओं में जम जाता है। जिससे “ऐथेरोस्केलेरोसिस” होता है और फिर  दिल का दौरा पड़ने लगता हैइस पर काबू पाने के लिए लहसुन को बहुत उपयोगी पाया गया है। इसलिए जो  लोग हृदय रोग से बचना चाहते हैं उन्हें घी या मक्खन में लहसुन को भून कर खाते रहना चाहिए क्योंकि हृदय रोग धमनियों में जमा होने वाले कोलेस्टॉल पदार्थ के कारण होता है, जिससे हृदय रोग पैदा होता है। लहसुन धमनियों को सिकुड़ने से ही नहीं बचाता बल्कि रोग ग्रस्त धमनियों में जमे हुए कोलोस्ट्रोल को वहाँ से निकाल कर उन्हें साफ करके दिल को नई शक्ति देता है।

बुढ़ापे को जवानी में बदलें इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि बुढ़ापा जवानी में बदल जाता है, वैसे तो यह बात भी आम सुनने को मिलती है कि “आदमी और घोड़ा कभी भी बूढ़े नहीं होते” अब बात  मानव जाति की है यदि आप सब लोग बुढ़ापे के दुःखों से बचना चाहते हैं तो लहसुन का प्रयोग निरंतर करते रहें, इससे आप समय से पूर्व बूढ़े नहीं होंगे और स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। स्वप्नदोष अक्सर जवानी की आयु में यह रोग लग जाता है। इसका उपचार तो इतना ही है कि लहसुन की दो कच्ची तुरियां छील कर मुँह में रखें, और इन्हें चबाते हुए निगल जाएं यह काम रात को सोते समय ही करना होगा।

Change in the youth age at alloverindia.in
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नपुंसकता 60 ग्राम लहसुन को लेकर उसकी तुरियों का छिलका उतार कर खूब अच्छी तरह से साफ कर लें, फिर बारीक़ बारीक़ टुकड़ों में काट लें। 1. एक कड़ाही में 250 ग्राम देशी घी डाल कर उन्हें अच्छी तरह भून लें और फिर हर रोज सुबह उठकर दो चम्मच लेने से नपुसंकता दूर हो जाएगी। 2. 200 ग्राम लहसुन को पीस कर 600 ग्राम शहद में मिलाकर तले एक शीशे या चीनी के बर्तन में भरकर गेहूं की बोरी के अंदर एक मास तक दबाए रखें।एक मास के पश्चात उसे बाहर निकाल कर एक बड़ा चम्मच सुबह एक शाम को गाय के दूध के साथ पीने से नपुसंकता दूर हो जाएगी। 3. सुबह उठकर पांच कली लहसुन आधा किलो दूध के साथ पीने से नपुसंकता दूर हो जाएगी साथ ही शरीर में नई शक्ति भी पैदा होगी।

Impotence issues and solutions at alloverindia.in
Impotence Issues And Aolutions At Alloverindia.in In Hindi Language

वादी के रोग (वात रोग) वादी रोग से पेट में गैस अधिक बनने बीमारियां लग जाती है। इसलिए इस रोग को पहले  में करना चाहिए आगे चल कर यह काफी नुकसान देता है। इसका उपचार आरम्भ में तो बड़ी जल्दी हो सकता है इसके लिए:- लहसुन की बड़ी गांठ लेकर उसमें से सारी तुरियां अलग अलग कर के साफ कर लें, उसमें से 4 तुरियां 250 ग्राम दूध के अंदर उबाल लें। इस प्रकार से यह लहसुन की खीर तैयार हो जाएगी इसे कम से कम 6 सप्ताह तक इसे खाते रहें वादी रोग जाता रहेगा। गठिया गठिया यानी जोड़ों का दर्द होता है, इस के लिए लहसुन बहुत लाभदायक है – जैसे किसी प्राणी को गांठ रोग हो:- लहसुन 10 कली नमक दूध आधा किलो कुजा मिश्री 50 ग्राम दूध में लहसुन डाल कर उसे आग पर रख कर पका लें। फिर उसमें कुजा मिश्री मिलाकर खूब मजे से चालीस दिन तक खाने से गठिया रोग जड़ से उखड़ जाएगा। पीलिया पीलिया रोग में – चार कली लहसुन को पीसकर आधा गिलास थोड़े गर्म दूध में पका कर पी लें यह (चालीस दिन तक) पीना होगा इस से पीलिया ठीक हो जाएगा। डॉ. अरुण बाड़िया ने स्पष्ट कहा है कि लहसुन हृदय रोग के लिए बहुत उपयोगी है।

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मूली मूली की तासीर ठंडी होती है। इससे अनेक रोगों का उपचार हो सकता है जो रोग अनेक दवाओं से ठीक नहीं हो सकते उसे हम मूली द्धारा ठीक कर सकते हैं। जिनके से सबसे पहले हम उस गंभीर रोग की बात करते हैं जिसे:- पथरी रोग कहते हैं मूली के बीज 35 ग्राम, पानी 1/2 किलो मूली के बीजों को पानी में अच्छी तरह से उबाल लें, जब पानी आधा रह जाए तो छान कर पीस लें, इस प्रकार से उपचार को 15 से बीस दिन तक करने से मेदे की पथरी गल कर पेशाब द्धार से बाहर निकल जाएगी। 2. मूली का रस 20 ग्राम हर घंटे के पश्चात तीन बार दिन में पीते रहने और साथ ही मूली के पत्ते चबा कर खाने से पथरी गल कर पेशाब द्धार से बाहर आ जाती है। यह उपचार दो तीन मास तक चलेगा।

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गुर्दे का रोग एवं पेशाब का कष्ट आधा गिलास मूली का रस पिलाने के समय होने वाली जलन और वेदना मिट जाती है। बवासीर बवासीर रोग से लाखों लोग चिंतित हैं और अनेक प्रकार के कष्ट पा रहे हैं। ऐसे लोगों की भलाई के लिए मैं एक सस्ता और उपयोगी उपचार बता रहा हूँ। 1. कच्ची मूली हर रोज दिन में दो, तीन बार खाने से बवासीर के कारण आने वाला रक्त बंद हो जाता है। 2. मूली का रस एक कप इसमें एक चम्मच देसी घी डाल कर सुबह शाम दिन में दो बार पीने से हर प्रकार की बवासीर को आराम मिलता है। 3. एक कच्ची मूली को काट कर उसे नमक लगाकर रात को ओस में बाहर रख दें सुबह उठकर इसे खा लें, इससे बवासीर रोग जाता रहेगा। यह बीस दिन का कोर्स हैं। 4. 150 ग्राम मूली का रस लेकर उसमें 100 ग्राम देसी घी की जलेबी को एक घंटे तक भिगो कर रखें,फिर इसे खा लें, 15 दिन के कोर्स से हर प्रकार की बवासीर ठीक हो जाएगी।

The trouble urinating health issues and solutions at alloverindia.in
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मधुमेय (शुगर) हर रोज सुबह समय मूली  आधा गिलास, काला नमक, नींबू काली मिर्च डाल कर पीने से मधुमेय  पेट के सब  हो जाते हैं। पीलिया एक कच्ची मूली नींबू और काला नमक, काली मिर्च डाल कर खाने से (बीस दिन के कोर्स) से पीलिया रोग ठीक हो जाएगा। मासिक स्त्राव रुकने से कष्ट कई औरतों को मासिक धर्म के समय काफी दर्द होता है, ऐसे रोगी के लिए मूली के बीज 4 – 4 ग्राम हर शाम नित्य तीन बार देने से मासिक धर्म खुलकर आ जाता है। जिससे पेट में होने वाला दर्द ठीक हो जाता है। जिन औरतों का मासिक धर्म बंद हो गया हो और तीन चार मास से आया नहीं उसके लिए:- मूली, सोया, मेथी, गाजर के बीज सबकी समान मात्रा में लेकर एक समय चार – चार ग्राम की खुराक खाकर ऊपर से ताजा पानी पी लें, इससे मासिक धर्म चालू हो जाएगा और पीड़ा भी ठीक हो जाएगी।

नकसीर रोग रात के समय हलवाई के बने पेठे के दो टुकड़े लेकर (मूली के रस) एक गिलास में भिगो दें। सुबह उठकर उन पेठे के टुकड़ों को खोलें और मूली के पानी को पीलें पांच सात दिन तक इस उपचार करने से नाक की नकसीर बंद हो जाएगी।