आयुर्वेद चिकित्सा, नजला जुकाम खांसी, त्रिकुटादि वटी, भृंगराज तेल

0
97
Ayurveda Treatment at alloverindia.in

आयुर्वेद चिकित्सा: इसका लाभ वैध भाई तो उठाएंगे ही उनके साथ – साथ अनेक दुःखी लोग भी इसका लाभ उठा सकते हैं। मैं यह बात पूरे दावे से कह सकता हूँ की आप रोग मुक्त होने के साथ साथ स्वस्थ भी रह सकते हैं। नजला जुकाम खांसी: कारण – पेशाब तथा विष्ठा को रोकना। नाक द्धार से रज (धूल कण) अंदर जाने से। अधिक बोलते रहने से अथवा ऊँचा बोलने से। धुंए का मुँह या नाक में प्रवेश  करने से।अधिक ठंडा जल अथवा शीतल पेय का अधिक प्रयोग। पहचान – अधिक छींकों का आना, मस्तिष्क में भारीपन, शरीर का टूटना, नाक में पानी बहते रहना, गले में खारिश, नाक का बंद होना, शरीर का दुर्बल होना, नाक से गर्म सांसों का निकलना, प्यास अधिक लगना, छाती में दर्द तथा उसका रुक जाना, आँखें लाल होने के साथ – साथ निरंतर जलन और पानी निकलते रहना, हृदय में पीड़ा। ऐसे रोगों के लिए उपचार  के बारे में आपको बताया जा रहा है।

त्रिकुटादि वटी 

सोंठ,  मिर्च, पीपल, जौखार, हरड़ का छिलका इन सब जड़ी बूटियों को बराबर मात्रा में लेकर बारीक़ कूट पीस कर गुड में घोट लें, अब इसको मटर के दाने बराबर गोलियां बना कर किसी शीशी में डाल कर रखें। नजला, जुकाम के रोगी को एक – एक गोली सुबह शाम चूसने के लिए दें कुछ दिनों में वह रोग मुक्त हो जाएगा।

भृंगराज तेल

read about Bhringaraj oil at alloverindia.in

भांगरे का रस 250 ग्राम, तिल का तेल 125 ग्राम, सेंधा नमक 2 ग्राम, तीनों चीज़ों को एक साथ खुले बर्तन में डाल कर मीठी आग पर पका लें। अब इस तेल को एक-बूंद रात को सोते समय नाक में डाल लेने से, बंद नाक खुल जाएगी। नजला जुकाम कम होगा। आंखों से पानी निकलना बंद होगा।

विशेष तेल (व्याध्री तेल)

कटेरी की जड़, दस्ती वच, सुहागा, तुलसी, सोंठ, मिर्च, पीपल सेंधा, नमक इन सब चीज़ों को लेकर तिल के तेल में डालकर हल्की आंच पर पकाते रहें, जब यह पूरी तरह पककर सिद्ध हो जाए तो नीचे उतार कर शीशियों में भर लें। रोगी के नाक में दो समय दो दो बूँद डालते रहने से रोग से मुक्ति मिलेगी।

शिशु तेल

सहजना के बीज, कटेरी के बीज, दन्ती के बीज, सोंठ, मिर्च, पीपल सेंधा नमक, मिर्च, तथा बेलपत्र। इन सबको बराबर मात्रा में लेकर पीस लें, फिर तिल का तेल किलो लेकर किसी बड़े खुले मुँह के बर्तन में, आग पर रख कर पकाएं जब तेल आधा  रह जाए तो उसे नीचे उतार कर शीशी में भर लें। मुँह बंद करके संभाल कर रखें। रोगी की नाक में सुबह शाम दो – दो बूँद डालते रहने से वह कुछ ही दिनों में रोग मुक्त हो जाएगा।

शर्बत अनार

अनार पके हुए लेकर उनके दाने दो किलो निकाल कर चीनी 2 किलो मिलाकर उसे मीठी आग पर पकाएं पकने पर उसे बंद करके रखें। 1 – 1 ग्राम सुबह शाम दोपहर रोगी को पिलाएं। एक और उपचार – सोंठ, कूठ, पीपल, बेल, दाख इनके कलक से तथा इन के ही कवाय में पकाएं गए तेल को सिद्ध करें। छींकें आने पर इसे नसवार की भांति रोगी की नाक में चुटकी भर कर डालने से छींकों का आना रुक जाता है।

प्रतिस्याय से गले के रोग

गले में वृद्धि को प्राप्त हुआ, वायु पित्त, कफ, विदोष तथा रुधिर को दूषित कर गले का अवरोध करने वाले, अंकुरों द्धारा प्राण के लिए खतरा सिद्ध हो सकता है।

उपचार – 1. दारू हल्दी, नीम छाल, तज रसौंत, इंद्र जौ इन सबका कवाय शहद में डालकर पीने से रोग मुक्त हो सकते हैं। 2. कुटकी, अतीम, देवदार, पाढ़ल, नागर मोथा, इंद्र जौ इन सबको गौ मूत्र में पका कर पीने से वायु के कुछ अन्य रोग ठीक हो जाते हैं। 3. दाख, कुटकी, सोंठ, मिर्च, पीपल, दारू हल्दी, तज हरड़, बहेड़ा, आमला, नागर मोथा, पाढ़ल रसौंत, चूरनहार, तेजबल इन का बारीक़ चूर्ण कर शहद में मिलाकर चाटने से गले के रोग ठीक हो जाते हैं। 4. जवाक्षार, तेजबल, पाढ़ल, रसौंत दारू हल्दी तथा पीपल सबका चूर्ण बना कर शहद में मिला कर गोलियां बनाएं, यह गोली मटर के दाने के बराबर हो।

खुराक – 1. बड़ों  के लिए दिन में 3 बार एक – एक गोली चूसने को – छोटों के लिए दिन में 2 बार एक एक गोली चूसने को। 2. पियाबांसा का कवाय अथवा बबूल की अंतर छाल का कवाय बनाकर मुख में भरकर थोड़ी देर रखें फिर निगल जाएं, इससे गले के सारे रोग ठीक हो जाएंगे।

रसोन वटी

रसोन, तेजपाल, पाढ़, दारू हल्दी, पीपल इन्हें समान मात्रा में लेकर कूट पीस कर चूर्ण बना लें, इस चूर्ण को शहद में मिलाकर गोलियां बनाकर बना लें। खुराक- बड़ों के लिए दिन में 3 बार एक – एक गोली – छोटों के लिए दिन में 2 बार एक – एक गोली

मुख रोग

गले रोगों और मुख के रोगों में बड़ा चौड़ा अंतर नहीं होता। परन्तु फिर भी रोग तो रोग है, उसका उपचार भी उसी ढंग से करना चाहिए, मुँह के रोगों के बिषय में कुछ उपचार करने  पूर्व यह जान लें कि मुँह के रोगों के कारण – ओष्ठ, दांत, मसूड़े जीभ, तालु गला इन सब अंगो के रोगों को मिलाकर मुख रोग कहा जाता है। मुँह रोग के लक्षण – मुँह में छाले, जीभ पर जख्म, होठों का फटना, दाँतों का दर्द यह सब रोग मुँह को कष्ट देते हैं।

उपचार – 1. हीरा कसीम, लोध, पीपल, मेनसिल, फूल प्रियंग, तेजबल इन सबका चूर्ण बनाकर शहद में मिलाकर जीभ, होंठ तथा दांतों पर मलें तो मुख रोग से छुटकारा मिल जाएगा। 2. पांचों नमक तथा जौखार, शहद में मिलाकर प्रतिसारण करना, मस्तक हल्का करने वाला नसवार लेना, भोजन करना, मुख रोगों के लिए लाभदायक है।

मुस्तादिवटी

नागर मोथा, हरड़, सोंठ। मिर्च पीपल, वायबिडंग, नीम के पत्ते इन सबको गौ मूत्र में पीस कर गोलियाँ बना लें। खुराक – बड़ों के लिए 3 गोली हर रोज सुबह शाम दोपहर – छोटों के लिए 2 गोली हर रोज सुबह शाम दोपहर। इस गोली को खाने की बजाए चूसना अधिक अच्छा है।

सेचराध तेल

नीले फूल का पिया बांसा, 400 ग्राम, पानी 100 ग्राम पानी में डाल कर पकाएं, जब यह पक कर चौथाई रह जाए तो नीचे उतार लें, इसे छान कर घमासा खैर, दुर्गन्धित खैर, जामुन के पत्ते, आम के पत्ते, मुलहठी सब 20 ग्राम इन के कलक बना उसमें तेल या घी मिला कर हल्की आंच पर धीरे – धीरे पकाएं। इसे नीचे उतार कर ठंडा कर के किसी शीशी में डाल लें और दिन में दो तीन बार दाँतों पर मलने से दाँत रोग मुक्त हो जाएंगे।