आयुर्वेद Ayurveda की एक और खास क्रांतिकारी खोज आम

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A revolutionary discovery of Ayurveda and certain common

भूख लगना: नारंगी  थोड़ा काला नमक पिसी हुई सौंठ सुबह नहार मुँह खाएँ तो भूख खूब लगेगी। मौसमी द्धारा रोग उपचार: आयुर्वेद Ayurveda की खोज ने जो सबसे बड़ी सफलताएं प्राप्त की हैं, उनमें मौसमी नाम का फल अति उपयोगी और गुणकारी सिद्ध हुआ है, देखने में इसकी शक्ल संतरे मिलती है परन्तु गुण उससे काफी भिन्न हैं। पेट रोगों के लिए मौसमी बहुत लाभदायक है, इससे पाचन शक्ति बढ़ती है पेशाब खूब खुल कर आता है, दस्त के रोग में मौसमी नहीं लेनी चाहिए।मौसमी खाने में आने वाला पौष्टिक फल है। इसे निरंतर खाने से औषधि जैसे परिणाम मिलते हैं। रोगियों को यह शक्ति भी देती है और रोग नाश भी करती है कुछ रोगों में तो यह अति उपयोगी मानी जाती है जो इस प्रकार है –

जुकाम: ऐसे लोग जिन्हें बार – बार जुकाम हो जाता है उन्हें चाहिए कि मौसमी का रस थोड़ा सा गर्म करके, उसमें काला नमक और काली मिर्च डालकर पीते रहें तो उनका जुकाम ठीक हो जाएगा। शक्ति  का खज़ाना: मौसमी रस पाँचनाग मस्तिष्क और यकृत को शक्ति देता है। इसका रस खाए हुए भोजन को शरीरांश बनाने में सहायता करता है। जटिल रोगों तथा बुखार में इसका रस लेने  रोगी को कमजोरी नहीं घेरती। कब्ज: जिन लोगों को पुरानी कब्ज रहती है, यदि वे सुबह उठकर निरंतर मौसमी का रस पीते रहें तो यह कब्ज दूर हो जाएगी। सिर दर्द सुस्ती आदि रोग नष्ट हो जाते हैं। दिल के रोगियों के लिए: दिल के रोगियों के लिए मौसमी अमृत है क्योंकि इसके प्रयोग से रक्त वाहिनियां कोमल तथा लचकीली हो जाती हैं, उन में जमा हुआ (कैलेस्ट्रोल) जहरीली पदार्थ जो दिल साँस लेने से रोकता है वह मौसमी के रस से शरीर से बाहर निकल जाता है जिससे हृदय रोग दूर हो जाते हैं।

सेब (APPLE) द्धारा रोगों का इलाज: सेब मानव जाति के लिए किसी अमृत से कम नहीं। अनेक रोगों का इलाज आयुर्वेद Ayurveda ने सेब द्धारा दूर किया है जैसा कि- मानसिक तनाव, चर्म रोग गठिया: ऐसे रोगों में दो सेब रोज सुबह निहार मुँह खाने से यह सब रोग कुछ ही दिनों में मिट जाते हैं और शरीर में नया खून पैदा होता है नयी शक्ति आती है। दाँत रोग: ऐसे रोगों में दाँत गलते हों, उनमें सुराख़ हों उन लोगों को चाहिए कि खाना खाने के पश्चात 1 सेब दोनों समय खाएं इससे मुक्ति मिलेगी। नज़ला जुकाम: कमजोर मस्तिष्क के कारण भी इंसान को सर्दी जुकाम जैसे गंदे रोग लग जाते हैं जिनके कारण उन्हें काफी शारीरिक कमजोरी हो जाती है। ऐसे रोगियों को खाना खाने से पहले बिना छिले, एक सेब हर रोग खाना चाहिए।

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दिल की कमजोरी: दिल की कमजोरी के कारण ही दिल का रोग आरम्भ होता है इसलिए पहले से ही इसका उपचार आराम आरम्भ कर दें। ऐसे रोगी सेब का मुरब्बा सुबह 1 नग हर रोज खाएँ इससे दिल की कमजोरी दूर हो जाएगी। यदि अधिक कमजोरी महसूस हो तो इसे 250 ग्राम गाय के दूध के साथ लें। स्मरण शक्ति: आजकल लोगों की स्मरण शक्ति काफी कमजोर होती जा रही है, विशेष रूप से जो लोग दिमागी काम करते हैं उनके लिए तो सेब प्राकृतिक उपहार है उन्हें गाय या बकरी के दूध के साथ हर रोज एक नग अम्बरी सेब छील कर खाना चाहिए उन की स्मरण शक्ति भी बढ़ेगी शारीरिक शक्ति भी। पथरी रोग: आज पथरी रोग के कारण अनेक लोग चिंतित हैं क्योँकि इस रोग के कारण इंसान को पेट रोग तो लगते ही हैं इसके साथ गुर्दों पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। डॉक्टरों के पास तो इस रोग का एक ही इलाज रह गया है। वह है ऑपरेशन परन्तु मेरे विचार में तो यह अंतिम इलाज ही है, इसके पश्चात कोई और इलाज नहीं परन्तु इससे पहले तो अनेक इलाज हैं। ऐसे रोगियों के लिए हर रोज सेब का रस, खाली पेट लेना चाहिए जिन लोगों को पथरी रोग नहीं भी हो वे भी यदि सेब रस का सेवन करते हैं तो वे भविष्य में इस पथरी रोग से बचे रहेंगे।

बच्चों के पेचश: अक्सर बच्चों को पेचश रोग लगा ही रहता है कुछ बच्चों को तो दूध पीते ही उल्टी और दस्त आने लगते हैं, ऐसे बच्चों का दूध बंद करके थोड़े समय के पश्चात ही सेब का रस एक एक घंटे के पश्चात देते रहें इस से यह रोग जड़ से जाता रहेगा। (LIVER) जिगर और गैरा: यह रोग बहुत फैला हुआ है। जो लोग इन रोगों से बचने का प्रयास पहले से नहीं करते वे अपने लिए स्वयं दुःख खरीदने का कारण बनते हैं यदि वे हर रोग सुबह दो सेब तथा खाना खाने के पश्चात 1 – 1 सेब लेते रहें तो यह दोनों रोग ठीक  जाएंगे उनके शरीर में नयी शक्ति आएगी नया खून पैदा होगा। भूख लगना: जिन लोगों को भूख नहीं लगती उन्हें 1 खट्टे सेब का रस एक गिलास कूजा मिश्री मिलाकर हर रोज दो समय पीते रहना चाहिए। इससे भूख भी खूब लगेगी।

मलेरिया बुखार: अक्सर मौसमी बुखार लोगों को पकड़ लेता है, ऐसे रोगियों को सुबह दोपहर, शाम तीनों समय एक एक सेब की छील कर खाना चाहिए। बुखार तो उतर ही जाएगा परन्तु आपको पूरे ही सप्ताह तक इस सेब  प्रयोग आरम्भ रखना चाहिए। आयुर्वेद Ayurveda की एक और खास क्रांतिकारी खोज आम (MANGO) यह बात याद रखें कि खाने से पहले आम को ठंडे पानी में डालकर रखना चाहिए, अथवा फ्रिज में लगाकर ठंडा कर लें क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है। आम के साथ यदि ठंडा दूध पिया जाए तो यह और भी अधिक शक्ति देता हैकई लोग अपने अंदर मर्दाना कमजोरी महसूस करते हैं ऐसे लोगों लिए आम लाभदायक सिद्ध हुआ है।

एक रहस्यमयी जानकारी: विश्व स्वास्थ्य विभाग के परीक्षणों के आधार पर यह बात तो प्रमाणित हो चुकी है कि एक आम प्राणी को जीवित और स्वस्थ रहने के लिए अंतर्राष्ट्रीय इकाई विटामिन ए में 5000 की जरुरत है जो केवल 100 ग्राम अच्छी नसल के आमों में मिल जाते हैं। आप स्वयं इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि आम मानव जाति के लिए कितना लाभकारी है, जो लोग कमजोरी का शिकार हैं, उन्हें आम को चूसना चाहिए। पेट के कीड़े मारने के लिए: आम की गुठली को भून कर उसका चूर्ण तैयार कर लें, जिस प्राणी के पेट में कीड़े हों उसे आधा चम्मच एक बार थोड़े से गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

पेचिश (DYSENTRY): जिस प्राणी को पेचिश की शिकायत हो उसे आम की गुठली को पीस कर छाछ में डालकर पिलाने से पेचिश ठीक हो जाती है। टी. बी. (T. B.) एक कप आम के रस में साठ (60) ग्राम शहद मिलाकर सुबह शाम दिन में दो बार देते रहें यह कोर्स कम से कम 60 दिन तक होने से टी. बी. रोग ठीक हो जाता है यदि 60 दिन से न ठीक हो जाएगा। दिमागी कमजोरी: विशेष रूप से दिमागी काम करने वालों के लिए: एक कप आम का रस चौथाई कप दूध, एक चम्मच अदरक रस थोड़ी सी चीनी, इन सबको मिलाकर सुबह के समय पीते रहने से दिमाग की कमजोरी दूर हो जाएगी, साथ ही जिन लोगों को पुराना सिर दर्द हो वह भी जाता रहेगा।

हैजा: 25 ग्राम आम की कोपलों को अच्छी तरह पीस कर एक गिलास पानी में उबाल लें। जब पानी आधा रह जाए तो उसे नीचे उतार कर नीचे किसी बारीक़ छन्नी से छान कर गर्म, गर्म दिन में दो बार पिलाने से हैजा ठीक हो जाता है। बवासीर एवं पेचश: मीठा आम रस आधा कप, मीठा दही 25 ग्राम और चम्मच अदरक का रस इन सबको मिलाकर पीने से पुरानी बवासीर दूर हो जाती है। गर्म चीजों का परहेज जरुरी है। पेट रोगों का उपचार: रेशेवाला आम अधिक गुणकारी होता है, इससे ही कब्ज दूर होती है। बस ऐसे ही आम लेकर उन्हें चूसें और ऊपर से दूध पीएं, इससे पेट की सारी अंतड़ियाँ नरम होकर साफ हो जाएंगी जिस से आपकी पाचन शक्ति बढ़ेगी।

सौंदर्य वर्धक: निरंतर आम के सेवन से त्वचा का रंग साफ हो जाता है। चेहरे में निखार शरीर में चुस्ती यह सब आम चूसने के ही लाभ हैं। मधुमय: आम और जामुन का रस बराबर मिलाकर, निरंतर पीते रहने से मधुमय रोग जाता रहता है। पथरी: आम के ताजा पत्तों को छाया में सुखाकर बहुत बारीक़ पीस लें इन्हें बारीक़ छल्ली में छान कर आठ ग्राम हर रोज बासी पानी के साथ सेवन करने से पथरी रोग से मुक्ति मिल जाती है। आयुर्वेद की एक लाभकारी खोज अंगूर: अंगूर खाते तो बहुत लोग हैं परन्तु इसके गुणों के बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं, क्योंकि अँगूर खाने से जितने लाभ हैं उतने शायद ही किसी और फल को खाने से होते हैं। अँगूर के बारे में यह जान लें कि यही एक मात्र ऐसा फल है। जो गले से नीचे उतरते ही खून में मिलकर नयी शक्ति देता है। जो लोग इसे भोजन के रूप में खाते हैं वे मैंखर तथा क्षय जैसे रोगों से भी बच निकलते हैं अब आप स्वयं ही अंदाजा लगा सकते हैं कि अंगूर कितना गुणकारी फल है।

कैंसर (संसार का सब से भंयकर रोग): ऐसे रोगी का उपचार करवाने से पूर्व उसे तीन दिन तक उपवास करवाएं, फिर उसे अंगुर खिलाना शुरू करें, परन्तु यह एक दिन में दो किलो से अधिक नहीं होने चाहिए। करीब इस सप्ताह तक अंगूर खाने के पश्चात साथ में छाछ भी पिलाना शुरू कर दें इसके अतिरिक्त और कोई चीज खाने को न दें। यह उपचार एक मास के पश्चात ही अपना फल दिखाना आरम्भ करता है यदि कभी रोगी के पेट में दर्द हो जाए तो उससे घबराने की बात नहीं। जरुरत पड़ने पर दर्द वाले स्थान पर थोड़ा सेक किया जा सकता है। गठिया: निरंतर अंगूर का प्रयोग शरीर से उन लक्षणों  निकाल देता है जिनके कारण गठिया के कीटाणु शरीर के अंदर बने रहते हैं, इसके लिए हर रोज सुबह उठकर किलो अंगूर खाने चाहिए।

कैंसर के रोगी – इस ओर अवश्य ध्यान दें

  1. रोगी को 6 मास तक चूल्हे पर पकी खुराक न दें।
  2. पहले दो मास तक उसका खाना केवल अंगूर ही रखें।
  3. इसके साथ अंगूर के साथ और फलों का आहार भी किया जा सकता है।
  4. इसके पश्चात वाले महीने में अंगूर व फलाहार के साथ बिन पका हुआ भोजन ही किया जाए, इन फलों में संतरा टमाटर, मौसमी, काजू, बादाम भी हो सकते हैं।
  5. जब तक आप अंगूर का पूरा कोर्स कर रहे हैं उस अवधि में पूरा आराम करना चाहिए।

हृदय की पीड़ा तथा धड़कन: यदि रोगी अंगूर खाकर ही ठीक रहें तो अधिक अच्छा है ऐसा करने से उन्हें जल्दी आराम मिलेगा। जैसे ही दिल में दर्द हो और धड़कन तेज हो जाए तो उसी समय ताजा अंगूर का रस पी लें दर्द जाता रहेगा। दाँत आना: जिस समय बच्चों के दाँत आने आरम्भ होते हैं उस समय बच्चों को अधिक कष्ट होता है यही नहीं उन्हें अनेक रोग भी लग जाते हैं। इसलिए जैसे ही बच्चा दांत निकालने लगे तो उसे अंगूर के रस के दो – दो चम्मच दिन में तीन चार बार देते रहें। औरतों के मासिक धर्म में गड़बड़ और सफ़ेद पानी का आना: औरतों के यह दोनों रोग बहुत कष्टदायक माने जाते हैं इसलिए आयुर्वेद के गुणों का लाभ उठाएं और अपने इस कष्ट से मुक्त हों, ऐसी औरतों को 100 ग्राम अंगूर, हर रोज दिन में तीन बार खिलाते रहें इससे मासिक धर्म ठीक हो जाएगा।